क्या रखा है जागने में - KAVITA RAWAT
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Thursday, February 17, 2011

क्या रखा है जागने में

जो जागत है वो खोवत है
जो सोवत है वो पावत है

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !

इधर-उधर बेमतलब जाना छोड़ो
सीधे घर नित अपने दौड़ो
छोड़ आपस की चिकचिक
चादर तान के घर में सोओ
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!
        
           @ Kavita Rawat

75 comments:

संजय भास्‍कर said...

आदरणीय कविता रावत जी
नमस्कार !
आज बदले हुए मिजाज जीवन की हकीकत का .. सुन्दर चित्रण किया है आपने.. बहुत बढ़िया...

संजय भास्‍कर said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!
खासकर इन पंक्तियों ने रचना को एक अलग ही ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है शब्द नहीं हैं इनकी तारीफ के लिए मेरे पास...बहुत सुन्दर..

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्दर रचना उतना ही सुन्दर शव्द संयोजन किया है आपने - धन्यवाद ।

mark rai said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में
...bahut sunder ...abhi fir se so jane ka man kar raha hai....

पी.एस .भाकुनी said...

ek soye huye samaj ko jagane ka ek naya andaaj,
ji bhar ke so lene ke baad hi yh samaj jagega isme koi sandeh nahi,

रश्मि प्रभा... said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में
hmmmmm... ye maa ki jhunjhlahat hai yaa patni kee ? jo hai sahaj saral hai

OM KASHYAP said...

बहुत ही सुन्दर रचना

धन्यवाद ।........

निर्मला कपिला said...

सोने वाले कब सुनते हैं किसी की व्यंग अच्छा लगा। शुभकामनायें।

Er. सत्यम शिवम said...

bhut hi sundar .........maza aa gaya

मुकेश कुमार सिन्हा said...

kya kahne hain...........aapne to ek dum se jeene ka mayne hi badal diye...maja hame bhi aaya:)

aaj se hi sone ka samay badha deta hoon:P

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

बहुत सुन्दर, वैसे कविता जी , बुरा न माने तो एक बात कहूंगा कि सुरु में जो व्यंगात्मक शैली आपने अपनी रचना में रखी अंत में उसे सदेशात्मक न कर व्यंगात्मक ही रखती तो और प्रभावी रचना बनती !

kshama said...

Wah!wah!wah! Ha!Ha!Ha!Thoda bahut net pe aaneka kasht to bin soye uthana hee padega! Ya key board pe so jana chahiye?:):)

सदा said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ

वाह ...बहुत ही खूबसूरत शब्‍द रचना ।

गिरधारी खंकरियाल said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में

यंहा पर तो आपने पूरी सरकारी कार्य शैली पर सुंदर व्यंग्य कसा है . शब्द संयोजन और धारा दोनों का प्रवाह निरंतर है

Shalini kaushik said...

sabhyta kee seema me bandha sarkari karya shaily par bahut karara vyang .bahut prabhavit kar gaya.likhti rahen. badhai..

डॉ .अनुराग said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !



मेरे लिए यही कविता है......

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

सोने वालों के जगाने के लिए अच्छी कविता !
सुन्दर व्यंग्य !

केवल राम said...

वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!

एक नए भाव बोध और शिल्प के साथ रची गयी कविता ...व्यंग्यात्मक ढंग से सन्देश संप्रेषित करने में सक्षम है ...

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, वेसे आज कल यही सब हो भी रहा हे, व्यंग्यात्मक रचना के लिये आप का धन्यवाद

प्रवीण पाण्डेय said...

समाज का सत्य उद्घाटित करता व्यंग।

vijay said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !
यही सब तो आजकल हो रहा है! आजादी के बाद से हम पूरी तरह जागे ही ही कहाँ हैं! जहाँ देखो वहीँ भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, चोरी-चकारी, चमचागिरी यही छाया है, अब तो लगता है जनक्रांति आ ही जानी चाहिए.. मुझे तो आपकी यह पोस्ट सोतों को जगाने का बहुत अच्छा तरीका लग रहा है.. सरकारी कामकाज के वही पुराने ढरे की बखिया अच्छी तरह उघाड़ी है आपने ..कविता जी आपका बहुत शुक्रिया!!

रचना दीक्षित said...

बस किसी तरह ये कमेन्ट डाल दूं काफी नीद आ रही है. कविता का आनंद सोते सोते ही लिया जायेगा

Anonymous said...

इधर-उधर बेमतलब जाना छोड़ो
सीधे घर नित अपने दौड़ो
छोड़ आपस की चिकचिक
चादर तान के घर में सोओ
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !

क्या कहने कविता जी! आपका किसी भी बात को कहने का एक अलग ही अंदाज है | आपके ब्लॉग पर आकर कुछ न कुछ नया अनुभव होता है, कुछ न कुछ नयी बात प्रायोगिक तौर पर आपकी रचनाओं में देखने को मिलता है | समाज में फैली विसंगतियों को एक नए अंदाज में प्रस्तुत करने का आपका शगल बहुत प्रभावित करता है| बहुत अच्छी रचना प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

विशाल said...

सचमें,सोने में जो मज़ा है सोने वाले ही जाने.
आपकी रचना ने तो हमें जगा दिया है.
सलाम.

सम्वेदना के स्वर said...

बहुत शानदार व्यंग्य है कविता जी!!
किस किस की फ़िक्र कीजिये, किस किस को रोईये,
आराम बड़ी चीज़ है, मुँह ढँक के सोईये!

Sushil Bakliwal said...

किस-किस को याद करो, किस-किस को रोओ
आराम बडी चीज है, मुँह ढंककर सोओ.

pratibha said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
..............
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !

बहुत शानदार व्यंग्य है कविता जी!!
बहुत सुंदर, वेसे आज कल यही सब हो भी रहा है!
समाज में फैली विसंगतियों को एक नए अंदाज में प्रस्तुत करने का आपका शगल बहुत प्रभावित करता है| बहुत अच्छी रचना प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

rashmi ravija said...

बहुत ही रोचक...आनंद आ गया पढ़कर

Rajeysha said...

सपनों से बाहर आयें और जागें तो नारी को नमन एक रचना हमारी भी http://rajey.blogspot.com/

हरीश जोशी said...

सटीक व्‍यंग्‍य सोने वालों पर और मधुर भाषा में कटाक्ष समय को यों ही खाने वालों पर ।

Surya said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!

मैडम जी! हम तो एकदम टाईटल देखकर चौंक ही गए थे कि आज पढ़कर सोया जाय पर पढ़कर नींद उड़ गई. अच्छा निराला ढंग है आपके जागने का बिलकुल स्कूल टीचर की तरह! बहुत बढ़िया लगा ..आपको बहुत धन्यवाद

Dolly said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में
...........बहुत बढ़िया बात कही आपने. दुनिया को दिखावा करने के लिए रामनाम जपने वालों की कमी नहीं है, उनको जगाने का बहुत अच्छा तरीका ढूंढ़ लाई है आप! बड़ी ही सहजता से बहुत बड़ी बात कह जाना यही चीज आपके ब्लॉग तक खींच लाती है मुझे.... बहुत शुक्रिया आपका

डॉ. मनोज मिश्र said...

आपको शुभकामना हेतु बहुत धन्यवाद-आपके आशीर्वाद का सतत आकांक्षी -
--मनोज मिश्र

Sunil Kumar said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सीधे सादे शब्दों में सुंदर कविता पढवाने के लिय धन्यवाद , बधाई

शूरवीर रावत said...

बेहतरीन व्यंग्यात्मक भावाभिव्यक्ति. ऑफिस में तो यह नजारा आम होता है विशेषतः सरकारी ऑफिसों में. आभार.

कुमार राधारमण said...

आराम हराम है समर्थक नेहरूवादी सावधान!

shailendra said...

इधर-उधर बेमतलब जाना छोड़ो
सीधे घर नित अपने दौड़ो
छोड़ आपस की चिकचिक
चादर तान के घर में सोओ
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !
बहुत ही सुन्दर रचना उतना ही सुन्दर शव्द संयोजन किया है आपने ....बेहतरीन व्यंग्यात्मक भावाभिव्यक्ति. धन्यवाद ।

Aruna said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में

सटीक व्‍यंग्‍य दिखावा करने व सोने वालों पर और मधुर भाषा में कटाक्ष ...आभार

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

मीठा व्‍यंग्‍य।

---------
ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

ज्योति सिंह said...

सोओ-सोओ सोते सोते ही
नित नए सपने बोओ
सो सोकर ही तुम नित
मन में रामनाम को लाओ
सो सोकर मजे उडाओ
भला क्या रखा है भजने में
वो मजा कहाँ जगने में
जो मजा है चैन से सोने में
bahut sundar ise dekhkar gopal ji kavita 'aaram karo 'yaad aa gayi jise bachpan me padhi rahi ,aapko apne blog par bahut dino baad dekhi ,behad prasnnata hui ,aabhari hoon dil se aapki .

Unknown said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !


मैडम जी!हमारे ऑफिस में तो बहतों को सोने में बड़ा मजा आता है.... क्या करें काम काज इतनता तो रहता नहीं . क्या करें . कुछ तो सट्टा-पट्टा में व्यस्त रहते हैं और कुछ थोडा बहुत काम बाकी सभी फरमाते हैं आराम .... आपने को कान खड़े कर दिए हमारे... कान पकड़कर सच कह रहा हूँ अब मैं नहीं सूऊंगा जी.... नहीं तो किसी दिन हमरी भी फोटो सारी दुनिया देख लेगी... मैंने तो ऑफिस में बहुत को पढ़ा भी ली है आपकी कविता, खूब मजा आया जी.. खूब लिखो जी हम जैसे लोग तब तक जागने का प्रयत्न करते हैं.... धन्यवाद जी.

Arvind Mishra said...

मूदहूँ आँख कतऊँ कछु नाहीं -बढियां है !

ZEAL said...

रोचक शैली में सटीक व्यंग !

OM KASHYAP said...

suder sabdo ka sanyog
dhanywaad
aapka aabhar

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

हा हा हा

Unknown said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !

सोने वाले कब सुनते हैं
रोचक शैली में सटीक व्यंग ! शुभकामनायें।

Unknown said...

लाजवाब है आपका ब्लॉग..... आना पड़ेगा ज्ञानार्जन के लिए... धन्यवाद

विजय मधुर said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
bahut hee badhiya aaj kee hakeekat....

दिगम्बर नासवा said...

जो जागत है वो खोवत है
जो सोवत है वो पावत है ...

Apne to maayne badal diya ... vaise aaj ke maayne, is kalyug ke maayne yahi hain ...

Kunwar Kusumesh said...

सोने में आराम तो मिलता है.कविता बढ़िया है

Unknown said...

इधर-उधर बेमतलब जाना छोड़ो
सीधे घर नित अपने दौड़ो
छोड़ आपस की चिकचिक
चादर तान के घर में सोओ
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !

Very nice creation. Thanks

रंजना said...

बढ़िया व्यंग्य कसा आपने...

निट्ठल्लों को खबरदार किया...पर मोटी चमड़ी जाग जाएँ,तो फिर समस्या ही क्या बचे...

Amit Chandra said...

करारा प्रहार। देखें कबतक लोग सोते है।

Unknown said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!
बहुत ही करारा लिखा है आपने! अब तो इंडिया को भी जागना होगा!! जागो! जागो!!! हम आपके साथ हैं !! धन्यवाद

Vijuy Ronjan said...

Shayan sada hi sukhdayi,
jagrat awastha dukhdayi,
aankhein band to saapne hazar,
khuli aankh to sarvatra hahakaar.

Bahut acche vichar hain...sona waise bhi hitkar hai.ahladit hua padh kar.dhanyavaad.

Unknown said...

इधर-उधर बेमतलब जाना छोड़ो
सीधे घर नित अपने दौड़ो
छोड़ आपस की चिकचिक
चादर तान के घर में सोओ
भला क्या बनता है इस कदर
हरदिन यहां वहां भटकने में
वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में
bahut achhi kavita.. aapne samjhya hamne samjha.. aur bhi samjh jaai to phir kiya kahana.... bahut achha laga aapka blog..dhanyavad

Satish Saxena said...

यह बढ़िया लगा निकम्मा पुराण ! :-)
शुभकामनायें आपको !

शिवा said...

बहुत ही सुन्दर रचना,

Smart Indian said...

वाह जी वाह, बहुत बढिया।

Unknown said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
जो मजा है नींद में बड़बड़ाने में!

निट्ठल्लों को खबरदार ..... करारा प्रहार ......मोटी चमड़ी जाग जाएँ,तो फिर क्या समस्या!
बहुत बढ़िया व्यंग्य कसा आपने...शुभकामनायें !

Patali-The-Village said...

करारा प्रहार। देखें कबतक लोग सोते है।
बहुत बढ़िया व्यंग्य|

Unknown said...

सबसे सदा मिलजुल रहा करो
ज्यादा ऊंची मत दिया करो
गप्पें मारो जब न आये निंदिया
आते ही निदिंया तुरंत सो जाओ
अब भला क्या होता गप्पियाने से
वो मजा कहाँ गप्पियाने में
बहुत ही बढिया। रचना उतना ही सुन्दर शव्द संयोजन........... धन्यवाद ।

Unknown said...

very nice creation mam!!

vijay kumar sappatti said...

waah , waah , kya khoob likha hai ji , main soch raha hoon ki mere alaas ke liye ek ek sahi kavita hai .. maza aa gaya aur thoda sa man halka bhi hua..
abdhayi

-----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय

Amrita Tanmay said...

Sunrar shabdon se saji..sundar kavita..badhai

hamarivani said...

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

Anonymous said...

Please let me know how write in hindi.gkandari3@gmail.com

aarkay said...

एक कवि के शब्दों में :

" मेरी गीता के सच्चे योगी तो वो होते हैं ,
जो कम से कम बारह घंटे तो बे फ़िक्री से सोते हैं "
कहने का मन हो रहा है !
सुंदर कविता , कविता जी , अकर्मण्यता पर प्रहार करती हुई !

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 31/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Madhuresh said...

haha mazaa aa gayaa padhke!! :)

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह! :)))

Saras said...

करो रतजगा जाओ दफ़्तर
जाकर कुछ फाईल टटोलो
जब नींद का आए झौंका
बैठ बैठ झपकी ले लो
अब भला कौन सगा है
इन फाईलों के पन्ने में
वो मजा कहाँ इन्‍हें पलटने में
जो मजा है झपकने में !
......विचाराधीन सुझाव !!!!

Kailash Sharma said...

बहुत रोचक और सटीक व्यंग...

Dr.NISHA MAHARANA said...

waah ye bhi accha trika hai jgane ka....

Mamta Bajpai said...

वो मजा कहाँ चप्‍पल चटकाने में
जो मजा है नित खर्राने में !


वहुत खूब ......मजा आ गया