सदियों से फलता-फूलता कारोबार : भ्रष्टाचार - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Tuesday, April 26, 2011

सदियों से फलता-फूलता कारोबार : भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !

रुखी-सूखी खाने वालों को मिला
बनकर अचार
इतना लजीज बन तू थाली में सजा
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

ऊँच-नीच, जात-पात से परे
राजा-रंक सभी पर सम अधिकार
प्रशासन को रखे चुस्त-दुरुस्त
तुझसे बनती सरपट दौड़ती सरकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

तेरी आंच पर सिंक रही रोटियां
तवा तेरा मोटा काला परतदार
इतना पक्का रंग है तेरा
जिसके आगे दुनिया के सब रंग हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

कौन मिटा सकेगा हस्ती तेरी
जब नाते-रिश्तेदारों की है भरमार
तेरा किला ढहाने को आतुर है जनता
अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे हैं बेकार

कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!


... कविता रावत

61 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

ऊँच-नीच, जात-पात से परे
राजा-रंक सभी पर सम अधिकार
प्रशासन को रखे चुस्त-दुरुस्त
तुझसे बनती सरपट दौड़ती सरकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार

Nice post.
Please yh bhi dekhen

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/04/blog-fixing_25.html

Sushil Bakliwal said...

अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे बेकार.

सत्य वचन... बस नमस्कार, नमस्कार !

होनहार

सार्वजनिक जीवन में अनुकरणीय कार्यप्रणाली

गिरधारी खंकरियाल said...

भ्रष्टाचार ही सचमुच धर्मनिरपेक्ष और गरीबी अमीरी का भेद मिटाता है भारतवर्ष में !

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

बिलकुल सही व्यंग्य किया है आपने इस कविता के माध्यम से.

सादर
---------
भ्रम की परतें उधड़ रही हैं

vijay said...

तेरी आंच पर सिंक रही रोटियां
तवा तेरा मोटा काला परतदार
इतना पक्का रंग है तेरा
जिसके आगे दुनिया के सब रंग हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!
....sateek prahaar...
sabhi namaskar bhar hi to karte dikhte hain.. dikhawa bhar hai ki bhrastachar ko door karne ka!
Saadar

सदा said...

रुखी-सूखी खाने वालों को मिला
बनकर अचार
इतना लजीज बन तू थाली में सजा
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

बहुत खूब ।

www.navincchaturvedi.blogspot.com said...

भ्रष्टाचार न होता तो देश आज न जाने कितनी ज़्यादा तरक्की कर चुका होता| पर ये भ्रष्ट आचार तो जैसे युगों युगों से अमरत्व का वरदान पाए हुए है

नीरज गोस्वामी said...

वाह..भ्रष्टाचार पर आपकी रचना बहुत सटीक और सार्थक है...व्यंग का तड़का क्या खूब लगाया है इसमें...
नीरज

Anonymous said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !
..............
लम्बे अंतराल बाद आपकी पोस्ट पढने को मिली सबसे पहले इसके लिए शुक्रिया की आप अपनी व्यस्त जिंदगी से कुछ समय निकालकर ब्लॉग पर सामाजिक सरोकार से सरोबार पोस्ट लिखती रहती हैं....
आज की सचाई यही है की भ्रस्टाचार शासन प्रशासन में बैठे सूरमाओं का सबसे बड़ा कारोबार है, जिसके बदोलत जनता हर तरह से गुलामी भरी जिंदगी जीने पर मजबूर हैं.. आजाद में गुलामी की मानसिकता के बीच जीते लोगों को जी हुजूरी से निजात कहाँ! छोटे मोटे काम निकलवाकर अहसान समझ जिंदगी भर मुहं पर ताला फिट करवा लेते है और जय-जैकार करने से बाज नहीं आते है.... हल्ला बहुत है लेकिन अपनी आत्मा जाग्रत कर कितने इस भ्रस्टाचार को दूर करना चाहते है कोई कुछ नहीं कह सकता.. आपका आभार भ्रष्टाचार को नमस्कार!!!

रश्मि प्रभा... said...

तेरी आंच पर सिंक रही रोटियां
तवा तेरा मोटा काला परतदार
इतना पक्का रंग है तेरा
जिसके आगे दुनिया के सब रंग हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!... bilkul sahi

निर्मला कपिला said...

शायद ही कोई इसे मिटा सके। अपनी भी नमस्कार ही है। शुभकामनायें।

nilesh mathur said...

नमस्‍कार, नमस्कार
अति सुन्दर!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

sach me...namaskaar!!

Surya said...

तेरी आंच पर सिंक रही रोटियां
तवा तेरा मोटा काला परतदार
इतना पक्का रंग है तेरा
जिसके आगे दुनिया के सब रंग हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!..............
मैडम जी! सच कहें अपन को फूटी आँख नहीं सुहाता ये काला-सफ़ेद रंगने वाला फटे मुहं का भ्रस्टाचार... पर क्या करें कभी न कभी ऐसा कोई काम फंस ही जाता है की चक्कर काटने की हिम्मत नहीं रह जाती ... बिना लें-दें के कोई कहीं भी करवाना नामुमकिन सा हो जाता है ..... अब का करें हम गरीब की कौन सुने ..... थोडा बहुत ले दे कर बढ़ावा तो हम ही दे रहें हैं न? अब इसके चक्कर में फंसे तो रोजी रोटी भी जाती रहेगी... इसलिए हमारा भी भ्रस्टाचार को नमस्कार! और आपको सादर प्रणाम!...

शूरवीर रावत said...

भ्रष्टाचार तो parasite है और जो हम host हैं तो हमें भी तो नमस्कार न, कविता जी ?
इस प्रस्तुति के लिए आभार....... शुभकामनायें.

Apanatva said...

bahut sashakt rachana hai . bhrashtacharye kod se kum nahee.......
ise nikalna hee hai...sabhee ko Annajee ka sath dena hai.......hum kisee ko rishvat nahee denge kisee keemat par yahee se shuruaat karnee hai........


अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे हैं बेकार fir bhee koshish to karnee hee hogee......
aur kaisee ho?
baccho kee chutteeya chal rahee hongee ?
shubhkamnae....
tum bhee blog par shayad vyastta kee vajah se nahee aa paee.

BrijmohanShrivastava said...

सही है राजसी ठाटबाट कौन करेगा वहिष्कार , क्या बात है सरकार भी तुझी से दौड रही है या कहेें सरकार सरक नहीं है, जिसकी रोटिया काले और परतदार तवे पर सिक रहीं हों उसे नमस्कार है नाते रिश्तों की भरमार है । आरती है ये भृष्टाचार की

डॉ टी एस दराल said...

भ्रष्टाचार पर बढ़िया व्यंग ।
जो मिटा सके इसकी हस्ती , उस हस्ती का इंतजार है ।

kshama said...

Kya zabardast wyang hai! Rachana kee geytaa use aur bhee sashakt banatee hai!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

ऊँच-नीच, जात-पात से परे
राजा-रंक सभी पर सम अधिकार
प्रशासन को रखे चुस्त-दुरुस्त
तुझसे बनती सरपट दौड़ती सरकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार

बेहतरीन अभिव्यक्ति ...यही होता है....

राज भाटिय़ा said...

कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!
इन सब का नाश तो जनता ही करेगी , जनता यानि हम तुम सब मिल कर... जय हिन्द

रचना दीक्षित said...

कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

क्या व्यंग किया है इस कविता में. अभी तो भ्रष्टाचार जिंदाबाद ही चल रहा है.

Smart Indian said...

सोने की चमक से अछूता कौन रहना चाहता है। सुन्दर रचना!

Shah Nawaz said...

भ्रष्टाचार पर व्यंगात्मक चोट करती हुई आपकी यह बेहतरीन रचना बहुत पसंद आई!

Anonymous said...

भ्रष्टाचार!
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार!
बस नमस्कार, नमस्‍कार!

जो मिटा सके इसकी हस्ती, उसी का है इन्तजार!

प्रशंसनीय प्रस्तुति

Unknown said...

कौन मिटा सकेगा हस्ती तेरी
जब नाते-रिश्तेदारों की है भरमार
तेरा किला ढहाने को आतुर है जनता
अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्कार !
बस नमस्कार, नमस्कार!
.....................

कल तक हम फटेहाल घूमते थे
मारे बेरोजगारी के भटकते थे
कोई भी हमें नहीं पूछते थे
बड़ी जोड़-तोड़ से हमने सत्ता में बिठाएं है अपने नाते रिश्तेदार
उसी मेहनत से आज हमारी घर आयी है बहार
एक बार बड़ी हस्ती बन गया मैं
फिर जरुर झंडे डंडे लेकर करुगा भ्रष्टाचार का बहिष्कार
फिलहाल बनने मेरी हस्ती
फिलहाल मुझे कहना है सिर्फ नमस्कार! नमस्कार!!!!!

संजय भास्‍कर said...

कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

बहुत खूब ।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

वर्तमान का यथार्थ है आपकी कविता में .
लिए हार्दिक बधाई...

Coral said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !


इसके सिवा हम और क्या करे सोते हुयो को कैसे उठाये ,..... बस नमस्कार

ZEAL said...

ऊँच-नीच, जात-पात से परे
राजा-रंक सभी पर सम अधिकार
प्रशासन को रखे चुस्त-दुरुस्त
तुझसे बनती सरपट दौड़ती सरकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

Beautiful Satire !

.

प्रवीण पाण्डेय said...

सब तेरे पीछे पड़ते हैं,
अपनों से अपने लड़ते हैं।

Vivek Jain said...

रुखी-सूखी खाने वालों को मिला
बनकर अचार
इतना लजीज बन तू थाली में सजा
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

प्रेम सरोवर said...

वर्तमान युग के संदर्भ में सत्य को उद्भाषित करती आपकी कविता के लिए मेरे पास कोई विशेषण नही हैजिससे मैं इसे अलंकृत कर सकूं धन्यवाद।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक said...

दोस्तों, क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना.........
भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से (http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html )

Unknown said...

रुखी-सूखी खाने वालों को मिला
बनकर अचार
इतना लजीज बन तू थाली में सजा
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!
...जो मिटा सके इसकी हस्ती, उसी का है इन्तजार!
प्रशंसनीय प्रस्तुति

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा ... आज इसके बिना किसी का काम नही चलता ... साँसों के साथ इसे पीते हैं हम ....

भारतवासी said...

शानदार प्रस्तुति!

Pradeep said...

कविता जी प्रणाम !
भ्रष्टाचार अब आम आदमी के जीवन का अंग बन गया है ....उस की राग राग में बस गया है....गोया की कोई नशा हो जिसे छोड़ भी नहीं सकते ...और जिस से परेशां भी खुद ही हैं ......
भ्रष्टाचार को सचमुच नमस्कार है....

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक said...

दोस्तों, क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से (http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html )

Kunwar Kusumesh said...

भ्रष्टाचार पर ज़बरदस्त चोट करती सटीक रचना.

Dolly said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !

कविता जी! सबसे पहले तो आपकी लेखनी को नमस्कार फिर एकदम सटीक चोट करती रचना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आभार!!
सच तो यही है कि देश में आज भ्रस्टाचार से बड़ा दूसरा कारोबार नज़र ही नहीं आता! इसे देख बस नमस्कार ही कर सकता है आम पीड़ित जनता और करती भी क्या है?????????

shailendra said...

कौन मिटा सकेगा हस्ती तेरी
जब नाते-रिश्तेदारों की है भरमार
तेरा किला ढहाने को आतुर है जनता
अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे हैं बेकार...........................................................................................
भ्रष्टाचार!
जनता के काम होते है इससे हजार
फिर क्यों करें हम इसका बहिष्कार
बहुत मेहनत और दिमाग का खेल है यह
जो न कर पाता वह वही है बेकार
डॉक्टर, इंजिनियर बन जाते हैं इसके बलबूते
इसी के बलबूते दौड़ता प्रशासन चल रही है सरकार
फिर क्या खाकर करेंगें हम इसका बहिष्कार
बस नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार
आपको भी कोटि-कोटि नमस्कार!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Satish Saxena said...

यह पूजा अवश्यक है :-) शुभकामनायें आपको !

Unknown said...

अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे बेकार.

सत्य वचन... बस नमस्कार, नमस्कार !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर!
आज तो भ्रष्टाचारी देशभक्त बने बैठे हैं!

जयकृष्ण राय तुषार said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !
कविता जी भ्रष्टाचार पर यह एक दमदार कविता है बधाई और शुभकामनाएं |

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी कविता।

Unknown said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !

कविता जी! भ्रष्टाचार पर ज़बरदस्त चोट करती सटीक रचना है...
आपको बधाई और शुभकामनाएं |

Unknown said...

ऊँच-नीच, जात-पात से परे
राजा-रंक सभी पर सम अधिकार
प्रशासन को रखे चुस्त-दुरुस्त
तुझसे बनती सरपट दौड़ती सरकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!

भारतवर्ष में भ्रष्टाचार ही सचमुच धर्मनिरपेक्ष और गरीबी अमीरी का भेद मिटाता है!
भ्रष्टाचार को सचमुच नमस्कार है!!!!!!

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक said...

श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

Unknown said...

भ्रष्टाचार!
तेरे रूप हजार
सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्कार, नमस्‍कार !
..
इसे कोई नहीं झुठला सकता की आज बिना इन भ्रष्टाचारियों के न तो सरकार चल रही और नहीं प्रशासन.... बहुत बड़ी बिडम्बना है प्रजातंत्र की... हिटलर या मुसोलिनी में से किसी ने प्रजात्रंत्र के बारे में कहा था "प्रजातंत्र मूर्खों का शासन है, जहाँ सौ मुर्ख मिलकर एक निर्णय नहीं ले पाते" आज के हालातों में यही सच साबित हो रहा है......
आज तो भ्रष्टाचारी देशभक्त बने बैठे हैं!
भ्रष्टाचार को सचमुच नमस्कार है?

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

जी भ्रष्टाचार पर लेख और कविताएं इसलिए लिखी जा रही हैं कि नेताओं और हुक्मरानों ने भ्रष्टाचार को भी भ्रष्ट कर दिया। इसमें भी ईमानदारी नहीं रही। उदाहरण के तौर पर नेता किसी काम को कराने के लिए पैसे लेते हैं, ये तो हुआ भ्रष्टाचार और पैसे लेने के बाद भी काम नहीं करते तो यही ना कहेंगे कि भ्रष्टाचार को भी भ्रष्ट कर दिया।
आपकी रचना वाकई बहुत अच्छी है।

पूनम श्रीवास्तव said...

kavita ji
kya karara prhaar kiya hai bhrashtachar par --bahut hi badhiya v samyik post
तेरी आंच पर सिंक रही रोटियां
तवा तेरा मोटा काला परतदार
इतना पक्का रंग है तेरा
जिसके आगे दुनिया के सब रंग हैं बेकार
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!
bilkul sateek chitran
bahut bahut badhai
poonam

OM KASHYAP said...

कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !
बस नमस्‍कार, नमस्कार!
jabardast rachna
aapka aabhar

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक said...

श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

अभिषेक मिश्र said...

सदियों से फलता-फूलता कारोबार
देख तेरा राजसी ठाट-बाट
कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार !

सही कहा है आपने.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

कविता जी सुन्दर रचना सार्थक भी -निम्न पंक्तियाँ बिलकुल सत्य हैं लेकिन देर है अंधेर नहीं आओ सब मिल अपना अपना योगदान देते रहें बालू पर खड़े महल ज्यादा नहीं टिकते अभेद्य तो हो ही नहीं सकते कभी भी धराशायी हो सकते हैं -अभी भी इस चरम सीमा के दौर में आप ने देखा होगा चप्पल जूते तो वे खा ही रहे भला सोचिये उनके बेटे स्कुल कालेज में क्या मुह दिखाते होंगे उनकी पत्नी और रिश्तेदार भी शायद आज साथ न चले सड़कों पर उनके ---
जब नाते-रिश्तेदारों की है भरमार
तेरा किला ढहाने को आतुर है जनता
अभेद इतना है किला तेरा
ब्रह्मास्त्र भी हो रहे हैं बेकार
शुक्ल भ्रमर ५

हल्ला बोल said...

ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
आप भी बन सकते इस ब्लॉग के लेखक बस आपके अन्दर सच लिखने का हौसला होना चाहिए.
समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
.
जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

देवेन्द्र पाण्डेय said...

चमत्कार को नमस्कार।

हल्ला बोल said...

ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
आप भी बन सकते इस ब्लॉग के लेखक बस आपके अन्दर सच लिखने का हौसला होना चाहिए.
समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

Shikha Kaushik said...

bhrashtachar ko nahi aapko itni sarthak prastuti hetu NAMASKAR.