बचपन की वो भोली खुशियाँ
महंगाई का साया और जीवन की यांत्रिकता
तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह अपना दिन याद आता है।
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा कि मैं रानी बन गई हूँ,
अब किससे कहूँ कि आज मैं रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ रही हूँ।"
आभार अपनों का बचपन में जब कभी किसी की शादी का न्यौता मिलता, तो मन मयूर नाच उठता था। ऐसा लगता मानो किसी 'शाही भोज' का निमंत्रण मिल गया हो। उन दिनों आज की तरह चटक-रंगीले निमंत्रण पत्रों का चलन नहीं था; बल्कि लोग स्वयं आत्मीयता और बड़े आग्रह के साथ घर-घर जाकर मौखिक न्यौता दिया करते थे। संदेश मिलते ही बाल-मन में उत्साह की हिलोरें उठने लगती थीं। नए कपड़े पहनने का चाव, नाचने-गाने की स्वतंत्रता और स्वादिष्ट पकवानों का लोभ—यही सब तो सोचकर हम फूले नहीं समाते थे।
बड़ों की दुनिया के झंझटों जैसे—शादी कहाँ और किससे हो रही है, कौन घराती है कौन बराती, क्या लेन-देन होगा और कैसा व्यवहार निभाना पड़ेगा—इन तमाम सामाजिक औपचारिकताओं से कोसों दूर, हम बच्चे सिर्फ अपनी मस्ती और हुड़दंग में मस्त रहते थे।
ढोल-दमाऊ की थाप और पंगत का स्वाद उस दौर की शादियों में आज के आधुनिक बैंड-बाजे नहीं, बल्कि पारंपरिक वाद्य यंत्रों—ढोल-दमाऊ, मुसक बाजा, रणसिंघा (तुरी) और नगाड़ों की गूंज हुआ करती थी। बारात के आगे-आगे जब दो या चार 'सरांव' नर्तक हाथों में ढाल-तलवार लेकर विभिन्न मुद्राओं में हैरतअंगेज नृत्य करते हुए गांव के चौपाल तक पहुंचते, तो समां बंध जाता था। उस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए आस-पास के ग्रामीण भी अपना कामकाज छोड़कर दौड़े चले आते थे। हम बच्चे भी घंटों उनके समानांतर अपनी धमाचौकड़ी मचाते हुए नाचते रहते थे।
बड़ों को खाने से ज्यादा नाचने-गाने का शौक था, लेकिन हम बच्चों के पेट में तो हुड़दंग मचाने के कारण जल्द ही चूहे कूदने लगते थे। जैसे ही भोजन की मनुहार होती, हम अपनी-अपनी पत्तल संभालकर पंगत में अग्रिम पंक्ति में बैठ जाते। पत्तल पर गरमा-गरम दाल-भात परोसते ही हम भूखे बाघ की तरह टूट पड़ते थे। अपनत्व और हंसी-मजाक के बीच परोसा जाने वाला वह सादा 'दाल-भात', आज की धक्का-मुक्की वाले 'बफे सिस्टम' के छप्पन भोगों से कहीं अधिक स्वादिष्ट और तृप्तिदायक होता था।
नया जमाना: शादी या एक पिकनिक? वक्त बदला और उस दौर की बातें अब अतीत के झरोखे में सिमट गईं। अब बच्चों का नया दौर है। आज जैसे ही घर में कोई खूबसूरत वेडिंग कार्ड आता है, बच्चे हमसे पहले ही कैलेंडर पर तारीख देखकर एक बड़ा सा गोला बना देते हैं। उनके लिए आज शादी-ब्याह किसी 'स्कूल पिकनिक' जैसा है। पड़ोस की शादी यानी एक दिन की पिकनिक, और दूर की शादी मतलब दो-चार दिनों की मौज-मस्ती। खैर, इसी बहाने हमें भी रोजमर्रा की भागदौड़ से इतर अपनों से मिलने-जुलने और बीते दिनों को याद कर थोड़ा थिरकने का अवसर मिल जाता है।
कभी-कभी हम दफ्तर और घर के तनाव में शादी की तारीख भूल भी जाएं, तो बच्चे याद दिलाना नहीं भूलते। आस-पड़ोस का विवाह हो, तो वे शाम को स्कूल से लौटकर बिना कहे अपना गृहकार्य (होमवर्क) निपटा लेते हैं और हमारे ऑफिस से आते ही चहकते हुए कहते हैं—"आज शादी में चलना है!"महंगाई का साया और जीवन की यांत्रिकता
बच्चों को तो बस खुशियों से सरोकार होता है, लेकिन कमबख्त इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में हमें जेब की ओर एक बार देखना ही पड़ता है। महीने में एक शादी हो तो निभ जाता है, लेकिन जब शादियों का सीजन हो और तारीखें एक साथ सिर पर आ जाएं, तो बजट डगमगा जाता है।
तमाम आर्थिक चिंताओं को दरकिनार कर मैं हर आमंत्रण में शामिल होने का प्रयास करती हूँ। मैं भली-भांति जानती हूँ कि घर और दफ्तर की चारदीवारी से बाहर निकलकर दुनिया देखने, हंसने-मिलने और तरोताजा होने का इससे बेहतर जरिया कोई और नहीं है। वरना, विवाह के बाद के जीवन की हकीकत तो कुछ ऐसी है:
"जब-जब मुझे किसी की शादी का निमंत्रण पत्र मिलता है,तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह अपना दिन याद आता है।
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा कि मैं रानी बन गई हूँ,
अब किससे कहूँ कि आज मैं रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ रही हूँ।"
आज की व्यस्त दिनचर्या ने भले ही जिंदगी को 'रोबोट' जैसा यांत्रिक बना दिया है, फिर भी मैं अपने उन सभी शुभचिंतकों और प्रियजनों की हृदय से आभारी हूँ, जो समय-समय पर अपने मांगलिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से मेरी खैर-खबर लेते रहते हैं। उनका यही स्नेह मुझे इस यांत्रिकता से उबारकर, दो दिन की मौज-मस्ती के बीच फिर से एक नए उत्साह के साथ जी उठने के लिए प्रेरित करता है।
..कविता रावत



52 टिप्पणियां:
बढ़िया प्रस्तुति ...... इसी का नाम जिन्दगी है !
शादी की सालगिरह की ढेरों हार्दिक शुभकामनाये !
आपने ये नहीं बताया कि रिमोट पतिदेव के हाथ में रहता है, सासू माँ के हाथ में रहता है या फिर बच्चों की छीना-झपटी ........ नौकरी और सामजिक व्यस्तताओं में ही गुम होकर रह जाता है :)(Jokes apart !)
शादी यदि घर के आस-पड़ोस की है तो एक दिन की पिकनिक और दूर की है तो 2-4 दिन की मौज-मस्ती भरी पिकनिक। खैर इसी बहाने हमें भी उनके साथ थोड़ी-बहुत मौज-मस्ती कर लोगों से मिलने जुलने का अवसर मिल जाता है और हमारी भी पिकनिक हो जाती है, यही सोचकर हम भी बीते दिनों को याद कर नाच-गाकर खुश हो लेते हैं।
..भागदौड़ भरी जिंदगी में शादी का पिकनिक कुछ तो राहत पहुंचा जाता है .. बहुत शानदार
मैडम आपने सही बात लिखी है ....कामकाजी महिलाएं कब घर और ऑफिस के लिए रोबोट बन जाती हैं इसका पता उन्हें बहुत देर बाद चल पाता है ..कुछ भी हो आपने बहुत अच्छा डांस में कर लेतीं हैं, यह मैंने फोटो देख जान लिया है ....मैं अपनी शादी में आपको जरुर बुलाऊंगी ...आएँगी न आप ....
शादी की वर्षगांठ की बहुत- बहुत शुभकामनायें !!!!!!!!!!
bahut bahut badhaiyan kavita ji .
खूबसूरत पोस्ट ......
और बहुत बहुत बधाई आपको
Sunder Prastuti. Anurag Tiwari
हार्दिक बधाई - "मौज-मस्ती के बीच तरोताज़ी महसूस कर फिर से जी उठती हूँ" - हम तो पढ़कर और देखकर ही खिल उठे हैं" - धन्यवाद्
बहुत -बहुत बधाई...
बहुत अच्छी पोस्ट....
इसी तरह खुश रहिये...
:-)
मंगसीर में शादी तो ठण्ड की याद दिलाती है। अब आज ही देख लो, झमाझम बारिस हुयी आज। और ठण्ड बढ गयी है।
शादी की वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनायें।
शादी की सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाये,,,
resent post : तड़प,,,
सचमुच शादी जीवन का सबसे अनूठा पल होती हैं सारे लोग जुट जाते हैं हमारे लिए...
सामान्य चल रही जीवनशैली में एक उछाह सा आ जाता है।
यह वह क्षण होता है जब बिखरे परिवार भी मिल जाते है और सभी मे प्रेम भाव तथा एक दूसरे को सभी की अहमीयत भी यह क्षण बतला जाता है
फेसबुक थीम को बदले
कल 01/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
बचपन में जब बैंड बाजा बारात देखते थे तब बहुत रोमांचित होते थे। अब वो सब शोर सा लगता है।
इक आवागमन की शिकार , प्रेम संबंधों की ख्वाइश हो गई है ,
शादियाँ आजकल काले धन की , बेख़ौफ़ नुमाइश हो गई हैं।
कविता जी , कविता में जाना कि आज आपकी वैवाहिक वर्षगांठ है।
बहुत बहुत बधाई , आप दोनों को।
bahut sundar aur achhi baat kahi aapne ........
शादी की वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं
वाह!!बहुत खूब!
मेरी शादी भी ३० नवम्बर को हुयी थी और मेरी बीबी भी शादी-ब्याह में खूब नाचती-गाती हैं ...मैं तो देखता रहता हूँ ..नाचने में मुझे शर्म आती हैं ...बहुत बढ़िया ठुमके के साथ मेरे पहाड़ की शादी का सुन्दर चित्रण ...अब वो दिन कहाँ!!!
शादी की सालगिरह मुबारक हो!!!!!!!!
शादी के बाद सही कहा आपने की जिंदगी रोबोट हो जाती हैं, कितने सपने देखते हैं हम शादी के पहले और फिर बाद ससुर की सुनो, सास की सुनो, देवर, ननद, पतिदेव और फिर बच्चों की भी सुनते सुनते रोबोट तो बनना तय हो ही जाता है ............ ऊपर से नौकरीपेशा महिलाओं तो तो ऑफिस में सुनना पड़ता है ............................. दोनों फोटो शानदार लगी ..हमें भी अपनी शादी याद आने लगी है ...फ़िलहाल देर से ही सही शादी की वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाई...........
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
दो दिनों से नेट नहीं चल रहा था। इसलिए कहीं कमेंट करने भी नहीं जा सका। आज नेट की स्पीड ठीक आ गई और रविवार के लिए चर्चा भी शैड्यूल हो गई।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (2-12-2012) के चर्चा मंच-1060 (प्रथा की व्यथा) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
बहुत अच्छी पोस्ट....शादी की वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!!!
शादी की वर्षगांठ पर ढेरों शुभकामनायें (belated )
शादी-ब्याह की बात सुन कर रोबोट सी बनी जिन्दगी में अचानक ख़ुशी से भरपूर भावनाएं जगने लगती है :))
आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा ..अगर आपको भी अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़े।
आभार!!
दौड़ती जिंदगी के बीच कुछ पल मिल जाते हैं रिश्तों से जुडी यादों को ताज़ा करने के लिए !
अच्छी पोस्ट !
बहुत बधाई और शुभकामनाएं!
प्रिय ब्लॉगर मित्र,
हमें आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है साथ ही संकोच भी – विशेषकर उन ब्लॉगर्स को यह बताने में जिनके ब्लॉग इतने उच्च स्तर के हैं कि उन्हें किसी भी सूची में सम्मिलित करने से उस सूची का सम्मान बढ़ता है न कि उस ब्लॉग का – कि ITB की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगों की डाइरैक्टरी अब प्रकाशित हो चुकी है और आपका ब्लॉग उसमें सम्मिलित है।
शुभकामनाओं सहित,
ITB टीम
पुनश्च:
1. हम कुछेक लोकप्रिय ब्लॉग्स को डाइरैक्टरी में शामिल नहीं कर पाए क्योंकि उनके कंटैंट तथा/या डिज़ाइन फूहड़ / निम्न-स्तरीय / खिजाने वाले हैं। दो-एक ब्लॉगर्स ने अपने एक ब्लॉग की सामग्री दूसरे ब्लॉग्स में डुप्लिकेट करने में डिज़ाइन की ऐसी तैसी कर रखी है। कुछ ब्लॉगर्स अपने मुँह मिया मिट्ठू बनते रहते हैं, लेकिन इस संकलन में हमने उनके ब्लॉग्स ले रखे हैं बशर्ते उनमें स्तरीय कंटैंट हो। डाइरैक्टरी में शामिल किए / नहीं किए गए ब्लॉग्स के बारे में आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा।
2. ITB के लोग ब्लॉग्स पर बहुत कम कमेंट कर पाते हैं और कमेंट तभी करते हैं जब विषय-वस्तु के प्रसंग में कुछ कहना होता है। यह कमेंट हमने यहाँ इसलिए किया क्योंकि हमें आपका ईमेल ब्लॉग में नहीं मिला।
[यह भी हो सकता है कि हम ठीक से ईमेल ढूंढ नहीं पाए।] बिना प्रसंग के इस कमेंट के लिए क्षमा कीजिएगा।
शादी की सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाये !
सही कहा आपने ! :)
शादी की सालगिरह की हार्दिक बधाइयाँ (Belated) !
~सादर!!!
शादी-ब्याह की मौज-मस्ती की बहुत शानदार प्रस्तुति देखने को मिली...शादी की वर्षगांठ की हार्दिक बधाई!!
I will immediately grasp your rss feed as I
can't find your email subscription link or e-newsletter service. Do you've any?
Kindly permit me understand so that I may just subscribe.
Thanks.
My blog :: quoted from
वाह...शानदार पोस्ट. शादी की सालगिरह मुबारक हो कविता जी.
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शादी की सालगिरह की शुभकामनायें |
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पंगत की रंगत गई ,गया प्रेम सत्कार
नयन तरसते देखने, पीले चाँवल द्वार
पीले चाँवल द्वार ,हुआ कैसा परिवर्तन
मोबाइल से कभी,मेल से मिले निमंत्रण
हुये सभी रोबोट, मशीनों की कर संगत
गया प्रेम सत्कार,खो गई पत्तल पंगत ||
आपकी पोस्ट को पढ़कर पता चला की आपकी शादी की साल गिरह है आपको बहुत बहुत बधाई बहुत अच्छा लगा सब पढ़ कर
शादी-ब्याह की मौज-मस्ती भी एक प्रकार से जीवन में रिफ़्रेश बटन के सामान है, शादी की वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!!!
नहीं नहीं- कविता जी - रोबोट भी क्या कभी ब्लॉग लिखते है...:) बहुत अच्छा लेख.शादियों में अब पहले वाली बात नहीं रही यह तो सच है पता नहीं कौन बदल गया---शादियां या हम....?
चलिए दो दिन ही सही रोबोट से बाहर निकलने का समय तो मिला शादी ब्याह में ..
भले ही थोड़ी देर सही ...शादी की वर्षगांठ बहुत बहुत मुबारक !
बढ़िया प्रस्तुती बहुत कुछ यादे फिर से ताजा हो गई पढ़कर
आभार ...
बहुत सुदर लगा। शादी के दिन का मौज मस्ती कुछ अलग प्रकार का आनंद देता है। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।
“जब-जब मुझे किसी की शादी का निमंत्रण पत्र मिलता है
तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह दिन खूब याद आता है।
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा रानी बन गई हूँ।
अब किससे कहूँ रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ़ रही हूँ।"
.........................................मेरे मन की बात पढ़ ली आपने ....अब हमारा भी यही हाल है ....
शादी के वर्षगांठ की बधाई..
शादी की वर्षगांठ की हार्दिक बधाई!!
recent post: बात न करो,
आपने सहसा ही भूली बिसरी बचपन की यादों में धकेल दिया, आत्मीयता के साथ आपने शब्दों से हुबहु वही चित्र रच डाला जिस पर समय की धुंध छा चुकी थी. अनायास ही बचपन की वो सारी घटनाएं याद आने लगी, बहुत सुंदर और सहज लिखा. आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं.
रामराम.
Behad khoobshurat andaj me aapne apnii shadi ki varshgath manane tarika khoj nikala, dhero badhayeeya,bilamb se hi sahi
सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
देर से ही सही ... पर आपको शादी की वर्षगाँठ बहुत बहुत मुबारक हो ...
आपकी प्रस्तुति बहुत दूर तक राडों में ले गयी ... बधाई इस सहज लिखने पे ..
बधाई!
bahut bahut badhaee.......
apnee aabhasee duniya se katna door rahee aur kitana ?
aabhas hee nahee raha......
shubhkamnae.....
मुझे भी शादी में खूब मजा आया ..... अब पहचानो तो जानूं ...
शादी के बाद मैं भी रोबोट बन गयी हूँ
भूल गयी हूँ सखी सहेलियों को ..बचपन को ...
रोबोट की मस्ती मस्त है!!
बहुत सुन्दर ब्लॉग!!!
परिवार की शादी तो आज कल मेल मुलाकात का एकमात्र ज़रिया रह गई है क्यूँकि ऐसे तो रिश्तेदारों के यहाँ कोई जा ही नहीं पाता है।
बहुत देर से सही आपको शादी की वर्षगांठ की मुबारकबाद...साथ ही क्रिसमस की मुबारकबाद भी...नया साल आने को है..सो उसकी मुबारकबाद बाद में दूंगा। वैसे काफी दिन से आप लिख नहीं रहीं ..क्या रोबोट सच में बन गई हैं या फिर एक महीने से पहले वाली कविता जी बन गई हैं औऱ हुड़ंदग मचा रही हैं कहीं।
गाँव में पहले अभिनन्दन पत्र पढ़ा जाता था. मुझे बड़ा अच्छा लगता था ये. अब वो ज़माना कहाँ रहा.
बहुत ही खूबसूरत पोस्ट
बहुत सुदर पोस्ट। मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं।
आधुनिकता के दलदल में फंसी में ज़िदगी का एक पक्ष यह भी है।
बढ़िया प्रस्तुति।
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