क्रिसमस, महामना मालवीय और अटल जी का जन्मदिवस - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

क्रिसमस, महामना मालवीय और अटल जी का जन्मदिवस



भारत में जैसे होली, दीपावली और दशहरा जैसे पर्व उल्लासपूर्वक मनाए जाते हैं, वैसे ही ईसाई धर्मावलंबी 25 दिसम्बर को ईसा मसीह के जन्मदिवस को क्रिसमस के रूप में बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं। इस दिन को बड़ा दिन भी कहा जाता है। परंपरा है कि घरों में क्रिसमस वृक्ष सजाया जाता है। मान्यता है कि ईसा के जन्म पर देवताओं ने एक सदाबहार वृक्ष को सितारों से सजाकर उनके माता-पिता को शुभकामनाएँ दी थीं।
      25 दिसंबर का दिन वैश्विक और भारतीय संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। जहाँ पूरी दुनिया इसे क्रिसमस के रूप में उल्लास के साथ मनाती है, वहीं भारत के लिए यह दिन दो महान राष्ट्रनायकों—महामना मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के रूप में गौरवमयी है।
       महामना मदन मोहन मालवीय, समाज सुधारक, पत्रकार, वकील और मातृभाषा के प्रबल समर्थक थे। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक और जीवन पर्यन्त भारत माता की सेवा में समर्पित रहे। उन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया। वे "सत्यमेव जयते" के उद्घोषक और विभिन्न मतों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में अद्वितीय थे। एनीबेसेंट ने उन्हें कहा कि वे “विभिन्न मतों के बीच मालवीय जी भारतीय एकता की मूर्ति बने खड़े हुए हैं।” 12 नवम्बर 1946 को उनका देहावसान हुआ, किंतु उनकी देशभक्ति और योगदान अमर हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के 11वें प्रधानमंत्री रहे, उन्होंने 24 दलों के साथ गठबंधन कर पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार को पाँच वर्ष तक सफलतापूर्वक चलाया। उनके शासनकाल में 1998 में पोखरण में गुप्त रूप से किए गए परमाणु परीक्षण ने भारत की सुरक्षा और सामर्थ्य को नई ऊँचाई दी। वे प्रखर वक्ता और सहृदय कवि थे, उनकी कविताएँ यथार्थवादी और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हैं।
       उनकी कविताओं की एक झलक जिसमें वे ‘पड़ोसी’ कविता में दुश्मन को ललकारते हुए वे लिखते हैं, देखिए—
"धमकी, जेहाद के नारों से, हथियारों से
कश्मीर कभी हथिया लोगे, यह मत समझो
हमला से, अत्याचारों से, संहारों से
भारत का भाल झुका लोगे यह मत समझो।"
‘जीवन की ढलने लगी सांझ’ कविता में वे लिखते हैं—
"उमर घट गई
डगर कट गई
जीवन की ढलने लगी सांझ।
बदले हैं अर्थ
शब्द हुए व्यर्थ
शांति बिना खुशियां हैं बांझ। "
सम्मान और उपलब्धियाँ
      दोनों महान विभूतियों को पद्म विभूषण सहित देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। मालवीय जी और अटल जी क्रमशः 44वें और 45वें भारत रत्न प्राप्तकर्ता बने।
      निष्कर्ष रूप में हम यह कह सकते हैं कि 25 दिसम्बर का दिन भारतीय जनमानस के लिए केवल क्रिसमस का पर्व ही नहीं, बल्कि दो महान विभूतियों—महामना मालवीय और अटल जी के जन्मदिवस का भी स्मरण दिवस है।
      आइए, हम सभी मालवीय जी और अटल जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए क्रिसमस की खुशियों को मिलजुलकर मनाएं।
...कविता रावत


16 टिप्‍पणियां:

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर आलेख.
अटल जी की कई कविताएँ मुझे भी बहुत पसंद हैं,जिनमें .....
'आओ फिर से दिया जलाएं' तो सभी को पसंद हैं.
अटल जी को जन्मदिन पर हार्दिक मंगलकामना और महामना मालवीय जी को श्रद्धा सुमन.

Surya ने कहा…

उमर घट गई
डगर कट गई
जीवन की ढलने लगी सांझ।
बदले हैं अर्थ
शब्द हुए व्यर्थ
शांति बिना खुशियां हैं बांझ।
सपनों से मीत
बिखरा संगीत
ठिठक रहे पाँ और झिझक रही झांझ।
जीवन की ढलने लगी सांझ।
..........वाजपेयी जी आजकल इसी दौर से चल रहे हैं ...कभी मीडिया में छा जाने वाले प्रखर वक्त आज मौन हैं ........यह कविता पढ़कर लगा जैसे उन्होंने अपने लिए ही यह बहुत पहले लिख लिया .....स्वास्थय लाभ की मंगलकामना के साथ ............क्रिसमस की बधाई ........ मालवीय जी को नमन...............

Arogya Bharti ने कहा…

सुन्दर सामयिक लेख ....
अटल जी को जन्मदिन पर हार्दिक मंगलकामना और महामना मालवीय जी को श्रद्धा सुमन!

Ritesh Gupta ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.... दोनो महानुभावों के जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ

http://safarhainsuhana.blogspot.in/

अन्तर सोहिल ने कहा…

बहुत अच्छा लेख
धन्यवाद इस पोस्ट के लिये

प्रणाम

Unknown ने कहा…

बहुत सुंदर आलेख....
दोनो महानुभावों के जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ

RAJ ने कहा…

एक राजनेता के साथ ही महान कवि, साहित्यकार और देशभक्त अटल जी और महान शिक्षाशास्त्री और समाजवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदानदान दाता महामना पं.मदन मोहन मालवीय जी को भारत रत्न दिये जाने की घोषणा नि:संदेह गौरव की बात है
..दोनों महामानवों को अग्रिम हार्दिक बधाई .......

डॉ. दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25-12-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1838 में दिया गया है
धन्यवाद

SANJAY TRIPATHI ने कहा…

अटलजी ने कभी लिखा था-" हुआ आवाहन स्वर्ण सवेरा रूठ गया। एक सपना देखा था मैंने सपना मेरा टूट गया।।" पर उनके सारे सपने साकार हुए और हो रहे हैं। सुन्दर आलेख के लिए आपको धन्यवाद एवं बधाई!

5th pillar corruption killer ने कहा…

BAHUT HI BADHIYA BLOG LEKHAN HAI AAPKA ! PRSHANSNIYA KARY

Ramesh pandey ने कहा…

सुंदर आलेख..

Rajendra kumar ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और सार्थक आलेख, आभार आपका।

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

युग पुरूष अटल जी को आरोग्य जीवन की शुभकामनाये एवं मालवीय जी को श्रद्धा सुमन।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुन्दर आलेख ... दोनों विभूतियों का योगदान किसी भी अन्य भारतीय से कम नहीं है देश, काल और समाज पर ... अफ़सोस की बात है की आज हर बात पर राजनीति का गंदा खेल खेला जाता है ... अटल जी को जनम दिन की बधाई ... क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें ...

Kewal Joshi ने कहा…

वाह ! उत्तम प्रस्तुति - आभार.

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.... दोनो महानुभावों के जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ। आपको क्रिसमस की बहुत बहुत शुभकामनाएं...!