रविवार, 1 मई 2016
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें:
"शब्दों में जीवन, भावों में समाज — कविता, कथा और प्रकृति के स्पंदन से जागृत होती है संवेदना की सेवा।"।
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें:
12 टिप्पणियां:
मजदूर दिवस पर अच्छी सम-सामयिक प्रस्तुति है
supb!!
बहुत बढिया कविता है... बधाई कविता जी.
बहुत अच्छी रचना है।मैं आपकी पोस्ट पढ़ता हूँ। अपने विचारों को आप सुन्दरता से अभिव्यक्त करती हैं।
बहुत अच्छी रचना है।मैं आपकी पोस्ट पढ़ता हूँ। अपने विचारों को आप सुन्दरता से अभिव्यक्त करती हैं।
बहुत सुंदर भावपूर्ण लिखा है ... मज़दूर दिवस को सार्थक किया है ... और दुर्गेलाल की रिकार्डिंग तो बहुत ही
मस्त है ... बहुत शुभकामनाएँ ....
भावपूर्ण ...मर्मस्पशी रचना
कविता जी, मजदुरों की व्यथा दर्शाती बहुत ही सुंदर रचना!
Behtreen Recording ki hai appne... Sun ke achha laga...
बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...
बेहतर है।
बेहतर है।
एक टिप्पणी भेजें