वीरानियाँ नहीं होती - KAVITA RAWAT
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Wednesday, November 6, 2019

वीरानियाँ नहीं होती

प्लीजेंट वैली राजपुर, देहरादून से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'हलन्त' के अंक नवम्बर, 2019 में प्रकाशित मेरी रचना 'वीरानियाँ नहीं होती"
जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती

चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती

मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती

कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

18 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 06 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (07-11-2019) को      "राह बहुत विकराल"   (चर्चा अंक- 3512)    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    वाह बहुत खूब लिखा है


    मेरी रचना और बताओ क्या हो रहा है  पर पधारें

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  4. नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 07 नवंबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
    जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती
    बहुत खूब कविता जी | बहुत बढ़िया शेरो से सजी रचना है |हार्दिक शुभकामनायें |

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  6. सुंदर रचना,
    सादर
    --- नील

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  7. शानदार ग़ज़ल।
    आधुनिक समाज का ऐसा दर्द बयां करती रचना जो आने वाले दिनों में और निखर कर सामने आएगा और टिस देगा।
    गांव की वीरानियाँ हो या दादी नानी का ना होना, या बच्चों की किलकारियां ना गूँजना। सब विषय कितने चिंतनीय हैं। बहुत खूब सारी रचना लाजवाब है।

    मेरी नई पोस्ट पर स्वागत है👉👉 जागृत आँख 

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  8. गहन अर्थ लिए हुए है हर शेर। बहुत सुंदर रचना कविता जी

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  9. बहुत सुन्दर कविता जी !
    ज़माना जिस तेज़ी से बदल रहा है, हम खुद को उस रफ़्तार से नहीं बदल पा रहे हैं. हमारी स्थिति नीरज के शब्दों में -
    'कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे'
    जैसी हो गयी है.

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  10. जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
    हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, कविता दी।

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  11. वाह!!कविता जी ,क्यख बात कही है आपने !! वो हँसी कहकहे कहाँ सुनाई देते अब , लोगों को मुस्कुराने का भी वक्त नहीं अब ।

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  12. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती


    बिलकुल सच्ची बात कही आपने
    एक शेर लाजबाब ,सादर नमस्कार

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  13. बुहत ही खूबसूरत शेर सभी ...
    ये कमाल की ग़ज़ल है .... हर शेर नयापन लिए ... ऐसा अंदाज़ देख कर आनंद आया ....

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  14. बहुत अच्छा लेख है Movie4me you share a useful information.

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  15. कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    बहुत सुंदर ग़ज़ल

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  16. बहुत सुंदर प्रस्तुति।धन्यवाद!

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