ये तेरा पैसा-मेरा पैसा - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

बुधवार, 30 नवंबर 2022

ये तेरा पैसा-मेरा पैसा



ये तेरा पैसा-मेरा पैसा
तेरा पैसा-मेरा पैसा
सारे जग को चलाता पैसा 
सारे काम कराये पैसा 
सारे काम बिगाड़े पैसा 
कमर तोड़ मेहनत करवाता 
यहाँ से वहां ये खूब घूमता 
सबको नाच नचाये पैसा 
ये तेरा  ...................

नाते रिश्ते  इसके पीछे
सबसे आगे रहता पैसा 
खूब हँसाता खूब रूलाता
पानी से बह जाता पैसा
ये तेरा  ...................

अपने इससे दूर हो जाते
दूजे इसके पास आ जाते 
दूरपास का ये खेल सारा
सबको खेल खिलाये ये पैसा 
ये तेरा  ...............


बना के काम घर लौटे
खुश होकर चादर ओढ़े
पर बिगाड़ा काम किसी ने
देकर ये पैसा 
पकड़ के सर हम सोचते रह गए 
किसने काम बिगाड़ा ये ऐसा
ये तेरा  ........................

जब घुटन आपस में 
क्या तेरा-मेरा
पैसा जुबां पे सांझ-सबेरा  
चलती लेन देन है खटपट
भाड़ में जाता सबकुछ सरपट 
नाता जग से न रहा अब पहले जैसा
ये तेरा  ............................

जब जाता बंदा छोड़ के दुनिया
तब कैसा ये पैसा
तब क्या तेरा पैसा 
क्या मेरा पैसा-पैसा
ऐसा कैसा है ये पैसा
लालच की इस होड़ में देखो
अंधा हो गया इंसां कैसा
एक जगह यह टिक नहीं पाता
कोई नहीं है इसके जैसा
ये तेरा ................

Poet- Kavita Rawat Singers- ZankyR, Happy music editor- bandlab Edited by VideoGuru:https://videoguru.page.link/Best

आज हमारी विवाह की 27वीं वर्षगांठ पर मेरे बेटे ने गाने के रूप में प्रस्तुत कर हमें उपहार स्वरुप भेंट किया है। 

कृपया एक बार जरूर उसके द्वारा बनाये इस गाने को सुनिए उसकी और उसके दोस्त की आवाज में।   बच्चोँ को प्रोत्साहित करने हेतु हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर गाने को Like और Subscribe करना न भूले।  . 



   

 


3 टिप्‍पणियां:

  1. शादी की सालगिरह की शुभकामनाएँ ।

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  2. ये तेरा पैसा, मेरा पैसा करनेवाले भूल जाते हैं कि पैसा कभी किसी का नहीं हुआ। आपने पैसे की रामकहानी और लोगों की सोच का कच्चा चिठ्ठा लिख दिया कविता जी

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  3. वर्तमान जीवन पैसे का गुलाम बन बैठा है। बहुत बढ़िया कहा।

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