तुम हां तुम - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

तुम हां तुम

तुम हां तुम हो... तुम हां तुम हमारे सपनों में आने वाले तुम हां तुम तुम ही हो चांद तुम ही हो सितारे तुम जो मुस्कुरा दो तो खुशियां भर दो तुम दिल में हमारे जब से है जाना तुम्हें तो तुम ही लगी दुनिया में सबसे प्यारे ओ मेरे हमदम बात हो आज की या कल की बात रहेगी सच एक यही कि मेरे दिल में हमेशा हो तुम ओ... मेरे हमदम... बिना तुम्हारे ना जी सकेंगे हम तुम हां तुम ओ मेरे हमदम


"यूं ही नहीं कोई ख्याल मन में आता है
यूं ही नहीं कोई उसे गुनगुनाता है
कोई तो बात उसमें जरूर होती है
जो दिल से निकल होंठों तक आती है"
..............ये पंक्तियाँ मेरे मन से यह गीत  सुनकर सहसा ही निकल पड़े। आज आपके लिए ख्यालों की यह बानगी लेकर आयी हूँ। लिंक पर जाकर एक बार जरूर सुनें और पसंद आने पर Like, Share और Subscribe कर बच्चे को प्रोत्साहित भी करें।  

Song for your #sweetheart ❤️ be them your bestie or your love of life share love among all 💕

10 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ९ दिसंबर २०२२ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. वाह !! बहुत खूबसूरत संगीतबद्ध किया है । लाजवाब ।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह!!!
    बहुत सुन्दर सुर...
    आपकी पंक्तियां भी लाजवाब हैं।

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  4. यथा माता तथा सुपुत्र!!!किशोरवय का मधुर अनुराग- राग! बहुत -बहुत बधाई और शुभकामनाएं प्रिय कविता जी।चैनल को subscribe कर लिया है ।सुरीला बेटा बहुत आगे जाये यही कामना है 🙏♥️♥️

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  5. मेरे दिल में हमेशा हो तुम
    ओ... मेरे हमदम...
    बिना तुम्हारे
    ना जी सकेंगे हम
    तुम हां तुम
    ओ मेरे
    हमदम

    बहुत सुंदर लाजवाब पोस्ट

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  6. बहुत दिनो बाद ब्लॉग में आपको पढ़ने का मुहूर्त निकला।😊

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  7. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (11-12-22} को "दरक रहे हैं शैल"(चर्चा अंक 4625) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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    कामिनी सिन्हा

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  8. आदरणीय मैम !
    तुम ! हम !तुम ! हम में
    बड़े साधारण शब्दों में पुरी दुनिया को समेट लिया है आपने ... मानों कोई नन्हा सा अंकुर वस एक छलांग में परिपक्ख हो गया हो।

    सुन्दर ! अति सुन्दर रचना !

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  9. सुन्दर रचना ...
    आपने सही कहा है मन कुछ लिखने के लिए किसी भी बात से ट्रिगर हो जाता है ...

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