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ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।
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गुरुवार, 25 सितंबर 2025

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप माता कूष्मांडा है,

सितंबर 25, 2025 0
जय जय जय कूष्मांडा मैया, चतुर्थ रूप में तुम हो दया। सृष्टि की देवी, ब्रह्मांड रचती, अष्ट भुजा में तुम सब रखती। हाथ में अमृत, कमंडल सोहे, सिं...
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