जब शेर पिंजरे में बन्द हो तो कुत्ते भी उसे नीचा दिखाते हैं - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Tuesday, January 19, 2021

जब शेर पिंजरे में बन्द हो तो कुत्ते भी उसे नीचा दिखाते हैं


जब मनुष्य सीखना बन्द कर देता है

तभी वह बूढ़ा होने लगता है

बुढ़ापा मनुष्य के चेहरे पर उतनी झुरियाँ नहीं  

जितनी उसके मन पर डाल देता है

अनुभव से बुद्धिमत्ता और कष्ट से अनुभव प्राप्त होता है

बुद्धिमान दूसरों की लेकिन मूर्ख अपनी हानि से सीखता है

जिसे सहन करना कठिन था उसे याद कर बड़ा सुख मिलता है

सुख दुर्लभ है इसीलिए उसे पाकर बड़ा आनन्द आता है

भाग्य विपरीत हो तो शहद चाटने से भी दांत टूट जाते हैं

जब शेर पिंजरे में बन्द हो तो कुत्ते भी उसे नीचा दिखाते हैं

...कविता रावत


19 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (20-01-2021) को "हो गया क्यों देश ऐसा"  (चर्चा अंक-3952)   पर भी होगी। 
-- 
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
-- 
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
--

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 19 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Sagar said...

Very Nice your all post. I Love it.
फ़्लर्ट शायरी

Jyoti Dehliwal said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, कविता दी।

Sudha Devrani said...

वाह!!!!
बहुत ही लाजवाब....।

Jigyasa Singh said...

सत्य को सन्दर्भित करती अनोखी रचना..

सुशील कुमार जोशी said...

सच है।

Anuradha chauhan said...

बेहतरीन रचना आदरणीया

Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल said...

बहुत ही प्रभावशाली चिंतन - - नमन सह।

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा said...

सत्य को बखूबी उजागर करती यथार्थपरक पंक्तियाँ। ।।। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया कविता रावत जी।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सार्थक संदेशयुक्त प्रेरक कथा 🌹🙏🌹

अनीता सैनी said...

सच कहा आपने...बहुत ही सुंदर सृजन।
सादर

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

भाग्य विपरीत हो तो शहद चाटने से भी दांत टूट जाते हैं :)
ऐसी ही एक कहावत बंगाल में भी है कि भाग्य खराब हो तो उन्नत पर बैठे हुए को भी कुत्ता काट खाता है

सधु चन्द्र said...

सत्य वचन।
सुंदर रचना कविता जी।
सादर।

विकास नैनवाल 'अंजान' said...

जब मनुष्य सीखना बन्द कर देता है
तभी वह बूढ़ा होने लगता है

प्रभावी, विचारोतेज्जक पंक्तियाँ.....

दिगम्बर नासवा said...

हर बात कितनी गहरी ... सत्य के कितनी करीब ...
सच है शेर पिंजरे में हो तो कोई भी भौंक सकता है ... बहुत लाजवाब लिखा है ...

Rishipratapsingh said...

Bahut































Balkul Hi Satya hai

Alaknanda Singh said...

बहुत खूब कव‍िता जी, आपने बहुत खूबसूरती से बताया क‍ि समय बड़ा बलवान...

Pt. Manoj Bhatt said...

बहुत सुन्दर लिखा कविता जी आपने