'छ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (सम्पूर्ण) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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गुरुवार, 2 जुलाई 2026

'छ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (सम्पूर्ण)

 छक्के छुड़ाने से लेकर छूमंतर  हो जाने तक हिंदी मुहावरों की कविता 

जो वीरों से टकराते हैं, वीर उनके छक्के छुड़ाते हैं,

पर विवश अकेले संकट में, केवल छटपटा कर रह जाते हैं।

 

जब दुश्मन पर आफत आती, तब छठी का दूध याद आता है,

संसार रूपी माया में यहाँ, छन भर का सुख ही मिल पाता है।

 

सच्चे कर्मों की दुनिया पर, एक दिन गहरी छाप पड़ती है,

जो सत्य मार्ग पर चलते हैं, उनकी छाती ठोकने की हिम्मत बढ़ती है।

 

कुछ नीच प्रकृति के लोग यहाँ, छाती पर मूँग दलते रहते हैं,

औरों की उन्नति देख-देख, छाती पर साँप लोटते हैं।

 

दुख में अपनों को खोकर जब, छाती फटने को आती है,

तब धीरज की शक्ति ही बस, गिरते इंसान को बचाती है।

 

दुष्टों की नीच चालें तो, सज्जन की छाया भी न छू पाती हैं,

उनकी करतूतों को देख सदा, दुनिया छी-छी करती जाती है।

 

भाग्य जब सदा मेहरबान हो, तब छींका अचानक टूटता है,

पर जो कमज़ोर को छेड़े-छाड़े, उसका तो गौरव छूटता है।

 

मर्यादा में रहकर बोलो, न हो छोटा मुँह और बड़ी बात,

कटु वचनों से मत किसी का, हृदय छलनी कर डालो दिन-रात।

 

जब कर्म निभाकर जीवन के, इंसानों को छुट्टी मिलती है,

तब कष्ट, रोग और बाधाएँ, जीवन से छू (छूमंतर) हो जाती हैं।


... Kavita Rawat

6 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर

Anita ने कहा…

रोचक और ज्ञानवर्धक

Priyahindivibe | Priyanka Pal ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Priyahindivibe | Priyanka Pal ने कहा…

बहुत अनोखी प्रस्तुति

M VERMA ने कहा…

ज्ञानवर्धक और रोचक

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!
बहुत सुन्दर , ज्ञानवर्धक सृजन

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