'च' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-2) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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मंगलवार, 30 जून 2026

'च' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-2)

क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

शुभ जनों के जब चरण पड़ें, सो सोया भाग्य चल निकलता है,

पर जो केवल चरब करे, उसका तो तेज ही ढलता है।

 

आँखों पर जब चरबी चढ़ती, इंसान अंधा हो जाता है,

पर बुद्धिमान जब चर्चा छेड़े, अज्ञान का तम मिट जाता है।

 

अवसरवादी संकट को देख, महफिल से चलता बनता है,

सच्चे मित्रों के आने से, जीवन में चहल-पहल बढ़ता है।

 

मूर्ख सदा ही चाँद पर थूक, खुद पर ही कालिख लाता है,

जो चादर से बाहर पैर पसारे, वह अंत में कष्ट उठाता है।

 

श्रेष्ठ कर्म जीवन में करके, सत्कुल में चार चाँद लगाना,

पर चिराग तले अंधेरा न हो, इस सच को भूल न जाना।

 

जब चिलमन उठती है सच की, पापी का भ्रम टूट जाता है,

तब डर से चेहरे पर हवाइयाँ उड़तीं, जब न्याय सामने आता है।

 

परिश्रमी ही जग जीतता है, चोटी-एड़ी का पसीना एक कर,

अहंकारी के चींटी जैसे पर निकलते, वह मिट जाता पल भर।

 

प्रेम का चोली-दामन सा साथ हो, तो जीवन महक उठता है,

पर मर्यादा खोने वाले का, जग में मान घट जाता है।

 

वरना ऐसी विपदा आएगी, फिर चैंदिया खुजानी पड़ जाएगी,

समय की मार पड़ी जो सिर पर, चैंदिया पर बाल न छोड़ेगी।


... Kavita Rawat

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