'खिचड़ी पकना/पकाना' से 'खड़ी सवारी आना' तक जानिए 'ख' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
षड्यंत्रों की जो 'खिचड़ी पकाते', वे सम्मुख कभी न आते हैं,
बात-बात पर जो खीस काढ़ते, वे केवल अपना उपहास कराते हैं।
अहंकार का
'खुमार तोड़ना' ही, मानवता की पहली सीढ़ी है,
डर तजकर अब 'खुलकर खेलना', माँग रही यह नई पीढ़ी है।
दानवीर की
'खुली मुट्ठी', जग का कल्याण कर देती है,
मेहनती की जिद्द हर मरुथल में, अपना 'खूँटा गाड़' देती है।
जब प्रयत्न 'खटाई में पड़' जाए, तो 'मन खट्टा' होना लाज़मी है,
पर अडिग रहे जो संकट में, वही पुरुषार्थ की असली ज़मी है।
विपदा में जब 'खड़ी पछाड़ें' खाता मन, कोई सहारा नहीं मिलता,
...Kavita Rawat


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