गीत: "उड़ जा रे पंछी" - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शनिवार, 6 जून 2026

गीत: "उड़ जा रे पंछी"

थूजा प्लांट में नन्हे मेहमान: शक्करखोरा पक्षी का उड़ान अभ्यास! Nature

छोटा सा तिनका, छोटा सा आशियाना,
सीखा है यहीं पे तूने मुस्कुराना।
थूजा की शाखों से, अंबर को तकना,
नन्हे से पंखों का ऐसे फड़कना।
हो... सहमा है दिल तेरा, डरना भी लाज़मी है,
पर हौसलों के आगे, झुकती ये ज़मीं है।
उड़ जा रे पंछी... उड़ जा रे पंछी,
अपनी नई दुनिया बसाने! उड़ जा रे पंछी...

सादे से रंगों में माँ की वो ममता,
राजकुमार सा पिता, जो थकने न पाता।
दाना खिलाया तुझे, उड़ना सिखाया,
आस-पास मंडरा के हौसला बढ़ाया।
सुन वो पुकार रहे, आकाश से तुझको,
कहते हैं "डर छोड़, छू ले तू फलक को"।
हिम्मत तू कर ज़रा, बस एक क़दम और,
तेरी ही उड़ान का है ये नया दौर।

पलकों में यादें तेरी, दिल में दुआएं,
चुपके से सुबह हुई, तूने पर फैलाए।
तू तो गया उड़ कहीं, अंबर के पार रे,
सूना हुआ घर मगर, खुशियाँ हज़ार हैं।
खुला है ये आसमान, बाँहें पसारे,
सजने लगे हैं अब तो तेरे ही नज़ारे।
उड़ जा रे पंछी... उड़ जा रे पंछी,
अपनी नई दुनिया बसाने!
उड़ जा रे पंछी...

... कविता रावत 

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