'ख' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (6) | हिंदी मुहावरा-माला | - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 15 जून 2026

'ख' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (6) | हिंदी मुहावरा-माला |

 
'खेत आना'  से 'खूँटे के बल कूदना' तक जानिए 'वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।

रणभूमि में कई वीर खेत आए/रहे, उन्होंने अपना खेत रखा,

कायरों ने ही डर के मारे हमेशा खेत छोड़ना या खेत काटना सीखा।

 

नियति ने ऐसा खेल किया/खेला, जिसे कोई समझ न पाया,

ज़िन्दगी को जिसने खेल समझा, उसने अंत में अपना खेल बिगाड़ पाया।

 

अत्याचारी का नाम-ओ-निशान मिटाकर, उसका खोज मिटाना ही धर्म है,

फँस गए विपत्ति में तो अब क्यों खोपड़ी खुजलाना, यह तुम्हारे ही कर्म हैं।

 

बेवजह की ज़िम्मेदारी को खोपड़ी पर लादना समझदारी नहीं होती,

जो दिन-रात बस ख्याली पुलाव पकाता है, उसकी कोई तरक्की नहीं होती।

 

बुरा काम करके खोटा खाना छोड़ो, खुद के पैरों पर खड़े होना सीखो,

दूसरों के यानी खूँटे के बल कूदना बंद करो, अपने स्वाभिमान को पहचानो।


... Kavita Rawat


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