'घ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-6) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 28 जून 2026

'घ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-6)

क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी। 

जो नादान हैं इस दुनिया में, वो घर फूँक तमाशा देखते हैं,

अपनी ही संपत्ति नष्ट करके, अज्ञान के मजे वो लेते हैं।

 

क्या मति मारी गई है तुम्हारी, जो ऐसी घास खाई है तुमने?

बिना मन के बस काम निपटाया, जैसी घास काटी हो तुमने!

 

जब बना-बनाया काम बिगड़े, मानो घी का घड़ा लुढ़क जाता है,

और जब सच्चाई सामने आए, तब घूँघट पलट/उठ जाता है।

 

मर्यादा की आड़ में जो महिलाएँ, घूँघट काढ़ती/करती हैं सदा,

ज्ञान की रौशनी आते ही, वे घूँघट का पट खोल देती हैं तब ज़रा।

 

वक्त का पहिया जब बदलता है, अचानक सब घूम पड़ता है,

पर जो मूर्खराज हैं दुनिया के, उन्हें घोंघा बसंत ही कहा जाता है।

 

जो अड़ियल रवैया छोड़ के अपना, प्रगति का घोड़ा फेरते हैं,

उल्लास से भर जाता है आँगन, मानो खुशियों से घर उठते हैं।

 

... Kavita Rawat

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