'च' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 29 जून 2026

'च' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1)

क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

जब मन में चंग उमहता है, इंसान बहक ही जाता है,

औरों के चंग पर चढ़कर वह, चंगुल में फँस जाता है।

 

मेहनत से जहाँ चक जमना था, वहाँ चक्कर में आता है,

गली-गली फिर चक्कर मारना, भाग्य उसे भटकाता है।

 

दोषी को चक्की पीसना है, यह न्याय यहाँ बतलाता है,

बातों के चटखारे भरना, सबको ही खूब सुहाता है।

 

जब दुष्ट यहाँ मिल जाते हैं, चट्टे-बट्टे लड़वाते हैं,

कमजोर समझकर औरों पर, वे सहसा चढ़ बैठते हैं।

 

दुनिया के चतुर तौलने को, अपनी आँखें तुम खुली रखो,

यह चमक चाँदनी आनी-जानी, सादे ही अपने विचार रखो।

 

जो चमड़ी जाए दमड़ी न जाए की चाहत मन में रखते हैं,

वे देख के संकट दुनिया का, चुपके से चंपत होते हैं।


... Kavita Rawat


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