क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।
जब कंधों पर आता है ज़िम्मा, तब घर का बोझ उठाना पड़ता
है,
जब खुशियाँ आँगन में महके, तब घर आबाद हो जाता है।
पर किस्मत की लाठी चलती है, तो घर उजड़ते
भी
देर नहीं लगती,
जो कुल का मान बढ़ाता है, वो घर का चिराग
और घर का उजाला
कहलाता
है।
कुछ लोग बने फिरते हैं यूँ ही, पिंजरे में घर के मर्द और शेर,
पर घर का भेदी
जब
लंका ढाए, तो हो जाते हैं सब
ढेर।
जो अपनों की बातें चुभती हैं, वो घर फोड़ने
का
काम करती हैं,
दुष्टों की बुरी ये आदतें, हँसते-खेलते घर को घालती
हैं।
सोचा था कि सब सुरक्षित हैं, और हम घर के घर ही रहेंगे,
पर लालच की कश्ती डूबी तो, घर डूबते भी सब देखेंगे।
जब तबाही का मंज़र आता है, महल घर का आँगन हो जाता है,
फिर बंदा न इधर का रहता है, वह घर का न घाट का रह जाता है।
... Kavita Rawat

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