'ख' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (2) | हिंदी मुहावरा-माला | - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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गुरुवार, 11 जून 2026

'ख' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (2) | हिंदी मुहावरा-माला |


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खम ठोकना/बजाना/मारना' से 'खाक का पैबंद' तक जानिए 'वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।

 

रणबीच वीर जब खम ठोकता, दुश्मन का दिल दहल जाता है,

संघर्षों से जब खमीर उठता, तब नया दौर बन आता है।

सच्चे मित्र को खरा परखना, विपदा में ही मुमकिन होता,

जो खराद पर चढ़कर निखरा नहीं, वह हीरा भी है रोता।

मेहनत से किसान खलियान करता, खेतों में खुशियाँ लाता है,

पर जब आपस में खाड़ा बजना, तो सब कुछ मिट जाता है।

जो खाक उड़ाए या खाक छाने, वह मंज़िल पा नहीं सकता,

एक दिन सबको खाक का पैबंद होना, कोई बचकर जा नहीं सकता।

... कविता रावत

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