'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-3) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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गुरुवार, 18 जून 2026

'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-3)

क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

जो गोद में बैठकर दाढ़ी नोंचे, वो गौं का यार कहाता है,

गला काटकर अपनों का ही, जो गहरा हाथ मार जाता है।

 

गैल बताकर दगाबाज़ी करना, दुर्जनों की गंदी आदत है,

गू का कीड़ा बन जिए सदा, जिसकी नीचता ही इबादत है।

 

गर्दन पर सवार जो होता है, वो केवल संकट लाता है,

गला रेतना अपनों का ही, पापी का धर्म कहाता है।

 

गला पकड़कर देना जबरन, यह तो बस खुली ठगी भाई,

गला फँसाकर सीधे साधे का, किसने दुआएँ हैं पाई?


... Kavita Rawat

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