क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।
जब अपने छोड़ के चले जाएँ, तो घर काट खाने को दौड़ता
है,
सन्नाटा ऐसा पसरा होता है, घर साँय-साँय
बस
करता है।
यादों की धूल हटाने को, घर के जाले बुहारने पड़ते हैं,
धूप-बारिश से बचने को, घर घाम में छवाने पड़ते
हैं।
जब रिश्ते नए पनपते हैं, कोई घर में डाल लेता है,
पर मर्यादा जब टूटती है, कोई घर से पाँव निकाल लेता है।
जब हार मान ले दुनिया से, इंसान घर का रास्ता लेता है,
तपकर जब वापस आता है, तब वो सच्चे अर्थों में घर का होता
है।
जब भाग्य बदलता है किसी का, वह किसी के घर जा पड़ता है,
बिना किए मेहनत भी तब, घर बैठी रोटी
का
सुख मिलता है।
पर कुछ लोग स्वार्थी होते हैं, जो सिर्फ अपना घर भरने में लगे हैं,
वे घर का कोना-कोना छान रहे, पर परोपकार से भागे
हैं।
... Kavita Rawat

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