'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-5) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शनिवार, 20 जून 2026

'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-5)

 

गर्दन फँसती है झंझट में, जब इंसान गच्चा खाता है,

फिर गाढ़े दिन की मार पड़े, तब गला पकड़ पछताता है।

 

गड्ढा खोदना औरों का, खुद  गड्ढ़े में धकेल गिराता है,

जो गोलमाल करता जग में, वो गू का टोकरा उठाता है।

 

गुस्सा पी जाना ही उत्तम, मत गुड़हल का फूल खिलाया कर,

जब गज़ब टूटना निश्चित हो, तब गम गलत कर मुस्कुराया कर।

 

गर्दन पर जुआ जो रखता है, जिम्मेदारी वो उठाता है,

गरमी निकल जाती उसकी, जो व्यर्थ ही आँख दिखाता है।


... Kavita Rawat

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