'काफूर होने' से 'कुछ का कुछ हो जाने' तक जानिए 'क' वर्ण से जुड़े मुहावरों की बेहद खूबसूरत काव्यात्मक रूप।
गायब हो जाना नजरों से, जैसे काफूर हो जाना,
स्वार्थ सिद्ध हो जाना अपना, यानी काम निकलना।
दूसरों के फटे में टांग न अड़ाना, काम से काम रखना,
रूप-रंग पूरा बदल देना, यानी काया पलट देना।
बिल्कुल अनपढ़ जो होता है, काला अक्षर भैंस बराबर,
कठिन दुख और कष्ट उठाना, यानी काला तिल चबाना।
देश निकाला दे देना, यानी काले पानी भेजना,
किताबी कीड़ा यानी हरदम पढ़ने में डूबा रहना
अलग हो जाना किसी बात से, अपना किनारा करना,
कार्य पूरा होना, संभल जाना, यानी किनारे लगना।
कार्य को सफलता से पूरा करना, किसी को किनारे लगाना।
कठिन कार्य पर विजय पाना, यानी किला फतेह करना।
परदे के पीछे से चाल चलना, अपनी किल्ली घुमाना,
भाग्य जाग उठना अचानक, यानी किस्मत चमकना।
दिन बदल जाना, दशा बदलना, यानी किस्मत पलटना,
मामला रफा-दफा कर देना, यानी किस्सा तह करना।
मदद माँगने दस्तक देना, किसी की कुंडी खटखटाना,
धीरे-धीरे तड़पा कर मारना, कुंद छुरी से हलाल करना।
दूसरे का अहित चाहना, स्वयं के लिए कुआँ खोदना,
भारी संकट में पड़ जाना, यानी कि कुआँ झाँकना।
लाभ के अवसर से वंचित रहना, कुआँ पर से प्यासा आना,
सीमित ज्ञान में जीने वाला, कुएँ का मेंढक कहलाना।
जहाँ का लाभ वहीं लग जाना, कुएँ की मिट्टी कुएँ में लगना,
विपत्ति में खुद ही कूद पड़ना, यानी कुएँ में गिरना।
गहराई नापने का यत्न करना, कुएँ में बाँस डालना,
सबकी मति ही भ्रष्ट हो जाना, कुएँ में भाँग पड़ना।
नष्ट कर देना, दमन कर देना, कुचलना या कुचल देना,
पासा पलट जाना अचानक, कुछ का कुछ हो जाना।
... कविता रावत


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