'क' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (8) | हिंदी मुहावरा-माला - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शुक्रवार, 5 जून 2026

'क' वर्ण के मुहावरों की अनोखी कविता (8) | हिंदी मुहावरा-माला


चाहे दुनिया से कोसों दूर रहो तुम, या भीड़ में कंधे से कंधा छिले,
हिम्मत न हारना जीवन में कभी, चाहे जितने भी काँटे मिलें
मत होने देना खुद को कभी तुम कौड़ी के तीन या कौड़ी के मोल,
अपनी साख बचाकर रखना दुनिया में, जहाँ लोग बदलते हैं बोल।
भले ही कोई कौड़ी को न पूछे, तुम अपनी पहचान अनूठी रखना,
लोभ-लालच में फँसकर कभी न, कौड़ी-कौड़ी दाँतों से पकड़ना।
मेहनत की राह पर चलोगे तो एक दिन कंचन भी बरसेगा,
मेहनत के दम पर ही तो जग में, हर कोई आगे बढ़ेगा।
सच्ची बातें कहना सीखो, जब भी तुम्हारा कंठ खुले,
विद्या को तुम कंठ करो सदा, ताकि अज्ञान के बंधन खुलें।
धर्म-कर्म की राह न छोड़ना, कभी न अपनी कंठी तोड़ना,
नेकी के रस्ते पर चलना सदा, सत्य से नाता जोड़ना।
मुश्किल आए तो सहारा बनना, सदा ही अपना कंधा लगाना,
विपत्ति में पड़े किसी राही को, प्रेम से काँधी दे जाना।
हालात चाहे जितने भी हों मुश्किल, कभी न अपने कंधे डालना,
दूसरों के हितों की रक्षा करना, अपना स्वाभिमान बचाना।
दुनिया में ऐसे भी लोग मिलेंगे, जो कंपा लगाकर फँसाएंगे,
काँटों पर लोटने वाले ईर्ष्यालु, राह में काँटा बन जाएंगे।
सावधान रहना उन लोगों से, जो औरों के हित को मिटाना चाहें,
जो काँधे पर रख बंदूक चलाते, और अपना उल्लू सीधा कर जाएँ।
तुम मन का काँटा दूर करो, और आगे कदम बढ़ाते जाओ,
सच्चाई और पुरुषार्थ के बल पर, जीवन को सफल बनाते जाओ।

... कविता रावत

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