'घ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-4) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शुक्रवार, 26 जून 2026

'घ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-4)

 क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

जो बेफिक्र हैं दुनिया से, वो घोड़े बेचकर सोते हैं,

और जब आती है खुशियों की घड़ी, वो घी के दिए जलाते हैं।

 

मनचाही मुरादें पूरी हों, तो घी का चिराग जलता है घर में,

बिना मांगे जो मिल जाए सब, तो घर पर गंगा आती है जीवन में।

 

जहाँ लक्ष्मी का वास हो सच्चा, वहाँ घी-दूध की नदी बहती है,

जब दो दिल एक हो जाते हैं, तब बातें घी खिचड़ी होती हैं।

 

जिसकी पाँचों उँगलियाँ घी में हों, उसे सब घर की खेती लगता है,

अपनों के बीच का मसला हो, तो वह घर की बात ही कहता है।

 

जब व्यापार और रिश्ते सुधरें, तब जाकर घर जमता है भाई,

मेहनत के बिना इस दुनिया में, किसने समृद्धि की सौगात पाई?

 

... Kavita Rawat

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