'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-7) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 22 जून 2026

'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-7)

 क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

गठरी बाँधकर सफर की, सबको एक दिन गुजर जाना है,

गंगा लाभ हो जाने पर, मिट्टी में मिल गड़ जाना है।

 

गंगा नहाकर कर्तव्यों से, जो अपनी गठरी कटना सहता है,

गति पाकर वो ही जग से, फिर अमर गीत में रहता है।

 

गोली मारो इस दुनिया को, क्यों गला फँसाकर रोते हो?

गंगा पार जब जाना है, तो क्यों गोता खाकर खोते हो?

 

गारद में रखना क्या काया को, जब मौत का बुलावा आना है,

गया कराकर पितरों का, सबको इस जग से जाना है।


... Kavita Rawat

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