'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-4) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शुक्रवार, 19 जून 2026

'ग' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-4)

क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।

गाँठ में बाँधो ज्ञान-वचन, मत गड़े मुर्दे उखाड़ो तुम,

गंगा-जमुना सी तहज़ी रख, नफ़रत की दीवारें फाड़ो तुम।

 

गले का हार बनो सबके, मत गला किसी का रेतो तुम,

गंगा की गैल में मदार के गीत गा, मत व्यर्थ समय को बेचो तुम।

 

जो गाय की तरह सीधा हो, उस पर मत गर्दन उठाओ तुम,

गले न उतरे जो कड़वी बात, उसे हँसकर तुरंत भुलाओ तुम।

 

गाँठ खुलना ही बेहतर है, मिट जाए दिलों का मनमुटाव,

गाँठ जोड़ना सीखो जग में, मत अपनों से बदलो स्वभाव।


... Kavita Rawat


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