क्या आप हिंदी मुहावरों को एक नए और मजेदार अंदाज में पढ़ना चाहते हैं? यहाँ पढ़िए बेहतरीन हिंदी मुहावरों की कविता जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी।
दुनिया की इस भूल-भुलैया में, जिसने घाट-घाट का पानी पीया है,
वही जानता है कि यहाँ दुश्मनों ने, किस तरह घात लगाने
का
काम किया है।
कुछ लोग यहाँ घात में बैठे
हैं, कुछ घात में फिरते रहते
हैं,
कमजोर दिखे जो राहों में, उसे घात पर चढ़ाने की
ताक में रहते हैं।
जीवन की राह में पग-पग पर, सीधे इंसानों ने घाव खाए हैं,
और अपनों ने ही अपनों को, नश्तर बन-बन कर घाव दिए हैं।
जब टूट चुका हो दिल कोई, तो लोग घाव पर नमक छिड़कते हैं,
वो मरहम कभी लगाते नहीं, बस घाव हरा कर
हँसते
हैं।
जब घाव पूरता
है
मुश्किल से, तब जाकर हिम्मत आती
है,
वरना चिंताओं में डूब-डूब, काया घुलकर काँटा हो जाती
है।
जो घुल-घुल कर जान देते हैं,
उन्हें घात कभी मिल
पाती
नहीं,
पर जो संघर्षों से लड़ते हैं, उनकी हस्ती कभी मिट पाती नहीं।
...Kavita Rawat

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