मरुस्थल सा जीवन - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

मरुस्थल सा जीवन

दूर-दूर तक दमक रहे हैं, तप्त रेत के कण,
बिन पानी के व्याकुल होकर, तरस रहा यह मन।
नीरस, निरुत्साहित, बेबस, मन में विकल विषाद,
मरुस्थल सा प्रतीत होता, जीवन का अह्लाद।

खोज रहा मन छाँव-पानी, मरु में कहीं न नीर,
कंटीली झाड़ियाँ खड़ी हैं, देने को बस पीर।
भागे व्याकुल मन मेरा, दूर पहाड़ों की ओर,
किन्तु वहाँ भी मौन खड़ी हैं, वीरानियाँ घनघोर।

दिन में सूरज अंगारों की, करता है बौछार,
फिर रातें क्यों बिखेरती हैं, चाँदनी का शृंगार?
तड़प-तड़प कर जीव जहाँ, तजते अपने प्राण,
सूरज को क्यों आता नहीं, दया का कोई ध्यान?

न हट सकता अम्बर से यह, अंगारा सा भान,
न जीवन की राहों से, कम होते व्यवधान।
शूल हमेशा चुभते हैं, देते केवल संताप,
कभी न बनते फूल ये, हरने को परिताप।

खड़ी हुई हूँ एक ऐसे, तिमिर-युक्त आलोक में,
जहाँ पसरा सन्नाटा है, केवल गहरी ओट में।
खड़ी सुलभ सुख-दुख के, दो पलड़ों के बीच,
झुका हुआ है दुख का काँटा, सुध-बुध मेरी खींच।

घिर-घिर कर आतीं घटाएँ, हर इक घाट-मँझधार,
पर पल भर में उड़ा ले जाता, उनको तीव्र बयार।
हतोत्साहित निहारती, मैं केवल रह जाती,
दिन के उजले में भी मुझको, तन्हाई डस जाती

copyright@Kavita Rawat

11 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

swasthya hi hamare liye shubhkamnayen hai.........swasth rahen

अजय कुमार ने कहा…

शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो , नव वर्ष मंगलमय हो । अच्छी रचना

Apanatva ने कहा…

swasthy ka dhyan rakhiye .sheeghr swasth labh kee shubhkamnae.

मनोज कुमार ने कहा…

आप शीघ्रातिशीघ्र स्वश्थ हों इसी कामना के साथ आपको नव वर्ष की मंगल कामनाएं।

बेनामी ने कहा…

सुख-दुःख यही तो जीवन है, अति शीघ्र स्वास्थय लाभ की कामना. रही कविता की बात कविता तो (मन के उदगार हैं) कविता है "दुख भरी" या "सुख-भरी" नहीं.

Yogesh Verma Swapn ने कहा…

SWASTHYA KA DHYAN RAKHEN.

निर्मला कपिला ने कहा…

कविता जी आपके स्वास्थ्य के बार्वेरे मे जान कर बहुत चिन्ता हुई। सर्दी भी बहुत है अपना ध्यान रखना। नये साल की बहुत बहुत शुभकामनायें। रचना बहुत अच्छी है।

संजय भास्‍कर ने कहा…

आप शीघ्रातिशीघ्र स्वश्थ हों इसी कामना के साथ आपको नव वर्ष की मंगल कामनाएं।

dweepanter ने कहा…

द्वीपांतर परिवार की ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

शरद कोकास ने कहा…

निराशा से बाहर निकलिये नववर्ष की शुभकामनाये।

Creative Manch ने कहा…

नववर्ष / मकर संक्रांति कि शुभकामनाएं
आप शीघ्रा स्वश्थ हों इसी कामना के साथ


★☆★☆★☆★☆★☆★
'श्रेष्ठ सृजन प्रतियोगिता'
★☆★☆★☆★☆★☆★
क्रियेटिव मंच

क्या आपको यह रचना पसंद आई?

ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: