मार्च 2013 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

गेहूँ-चने से भरे-लदे खेतों में एक दिन

मार्च 15, 2013 36
बच्चों के सिर से परीक्षा का बोझ उतरा तो उन्होंने चैन की बंसी बजाई तो मैंने भी कुछ राहत पायी। पिंजरे में बंद रटन्तु तोते की तरह एक ही रा...
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