जब वहां जगह बने, तो घर में भी स्थान मिल जाता है।
यह मनुष्य का एक छुपा हुआ खजाना है—
जहाँ छोटे-छोटे उपहार भी आत्मीयता जताते हैं,
और बड़े-बड़े उपहार महज़ दौलत का नुमाइश बन जाते हैं।
दौलत की चमक से कहीं बढ़कर है दिल की ये ख़ुशी,
हज़ारों गवाहों की तस्दीक से भी अफ़ज़ल है इसकी हँसी।
पर जब इस दिल के भीतर कोई ज्वाला भड़कती है,
तब शब्दों के रूप में कुछ चिंगारियाँ मुँह से निकलती हैं।
काँच का एक नाज़ुक महल है यह दिल,
काँच का एक नाज़ुक महल है यह दिल,
जो टूट जाए तो मरम्मत नामुमकिन सी होती है।
जब इसमें आग सुलगती है, तो ज़हन धुएँ से भर जाता है,
फिर आँखें छलक उठती हैं, और दिल भर-आता है।
@कविता रावत

11 टिप्पणियां:
भाव अच्छॆ है लेकिन कुछ कमी सी लगती है..कोशिश जारी रखें।शुभकामनायें।
GAREEBI PAR MERI RACHNA JAROOR DEKHNA KAVITA JI...
कुछ अलग से भाव लिये दिल से दिल पर लिखी रचना अच्छी लगी।
भाव ही सब कुछ होते हैं और जब भावों डूब कर कोई रचना की जाती है, तो वह दिल को छू जाती है.
....सुन्दर रचना!!!!
दिल आदमी का छुपा हुआ खजाना है
छोट-छोटे उपहार दिल से दिए जाते हैं
पर बड़े-बड़े उपहार दौलत दिखाना है...
सच कहा .... दिल तो बच्चा है, थोड़ा कच्चा है...... पर सच्चा भी है ........ अंदर उठते हुवे भावों का आईना है ......
बहुत अच्छी रचना है .........
Bahut acchee lagee ye kavita..........
दिल की ख़ुशी दौलत से बढकर है
यह हजारों लोगों से गवाही से बढकर है ..
बिल्कुल सही कहा है आपने! बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!
सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.
Naksali samasya per apke comments pravkta per sarahniya hain.
saritaiti@gmail.com
mera E Mail ID ye hai...
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