हरेक वृक्ष नहीं फलवाला वृक्ष ही झुकता है - KAVITA RAWAT
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Monday, August 8, 2016

हरेक वृक्ष नहीं फलवाला वृक्ष ही झुकता है

एक पक्ष की नम्रता बहुत दिन तक नहीं चल पाती है।
एक बार शालीनता छोड़ने पर वह लौटकर नहीं आती है।।

दूध में उफान आने पर वह चूल्हे पर जा गिरता है।
नम्र व्यक्ति अपनी नम्रता धृष्ट व्यक्ति से सीखता है।।

नम्र बनने के लिए कोई मोल नहीं लगता है।
सदा तराजू का वजनदार पलड़ा ही झुकता है।।

जो झुक जाता है उसे काटा नहीं जाता है।
वह कभी टूटता नहीं जो लचकदार होता है।।

शीलनता से अपमान सहन नहीं करना पड़ता है।
हरेक वृक्ष नहीं फलवाला वृक्ष ही झुकता है।।

19 comments:

Bharti Das said...

Bahut sundar satya ke sath

kuldeep thakur said...

जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 09/08/2016 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

सुशील कुमार जोशी said...

सटीक ।

Jyoti Dehliwal said...

नम्रता को बहुत ही अच्छे से रेखांकित किया है आपने। बधाई।

Sushil Bakliwal said...

विनम्रता व शालीनता बिना मोल के भी बहुत कुछ खरीद सकती है । उत्तम...

Sushil Bakliwal said...

विनम्रता व शालीनता बिना मोल के भी बहुत कुछ खरीद सकती है । उत्तम...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कलमंगलवार (09-08-2016) को "फलवाला वृक्ष ही झुकता है" (चर्चा अंक-2429) पर भी होगी।
--
मित्रतादिवस और नाग पञ्चमी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Rashmi B said...

सुंदर रचना..कविता जी

एक नई दिशा !

HARSHVARDHAN said...

आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति जन्मदिवस : भीष्म साहनी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

Unknown said...

Wow....you are great kavita ji...!!!
No matter how great you have to convince.
.
""Namrata"" jab nadi mebadh aati hai...to sab se pahle sidhe rahne wLe pedh bah jate hai....aur jhukne wale usi sthiti me rahate hai....vidya bhi vinay....se hi shobha deti hai.
Thanks you so much kavita ji.
9545717766 my whats app number.

Aap ki post ko main aur prasidhha karna chahta hun.

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

वाह, बहुत खूब।

प्रतिभा सक्सेना said...

नीतिपूर्ण उक्तियाँ .

गिरधारी खंकरियाल said...

नीतिगत पंक्तियाँ। (हरेक वृक्ष नहीं(,) फलवाला वृक्ष ही झुकता है)में अर्द्धविराम की आवश्यकता महसूस हुयी।

ज्ञान द्रष्टा said...

बहुत सुंदर और सटीक रचना

Asha Joglekar said...

बहुत सुंदर, झुकना टूटने से भी बचाता है।

दिगम्बर नासवा said...

अनुकरणीय युक्तियों को बाखूबी शब्दों में उतारा है ... सच है की नम्रता और विनम्रता इंसान को ऊंचा उठाती है न की नीचा ... झुकने में कोई बुराई नहीं है ...

Alpana Verma said...

अच्छी सीख देती हुई पंक्तियाँ ,कविता के रूप में इस प्रकार के सन्देश देना एक सार्थक प्रयास है.

ekullumanali said...

Very beautiful Kavita Ji, and good thought above from Asha Joglekar also. I am also from Uttrakhand and lives in Manali. Keep it touch.

यूसुफ किरमानी said...

बहुत सुंदर...