ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो दुःख और रोग से अछूता रहता है - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Friday, April 23, 2021

ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो दुःख और रोग से अछूता रहता है

ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो दुःख और रोग से अछूता रहता है 

थोड़ी देर का सुख बहुत लम्बे समय का पश्चाताप होता है 


एक बार कोई अवसर हाथ से निकला तो वापस नहीं आता है 

दूध बिखरने के बाद रोने-चिल्लाने से कोई फायदा नहीं होता है 


मनुष्य अपने भाग्य को नहीं उसका भाग्य उसे ढूंढ लेता है 

गम का एक दिन हँसी-ख़ुशी के एक माह से भी लम्बा होता है 


नियति कभी एक मुसीबत डालकर संतुष्ट नहीं होती है 

उसके आगे माथा टेक लेने में ही समझदारी रहती है


दुर्भाग्य उड़कर आता किन्तु पैदल वापस जाता है 

अभागे के हाथ में पारस भी पत्थर बन जाता है 


व्यस्त मनुष्य का समय बहुत जल्दी बीतता है 

समय का प्रवाह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है 


... कविता रावत 

13 comments:

  1. बड़ा नैराश्य है आपकी अभिव्यक्ति में माननीया कविता जी लेकिन अपने अनुभव से मैं जानता हूँ कि जिस पर बीतती है उसके दिल का हाल वही समझ सकता है, कोई दूसरा नहीं। केवल इतना कहूंगा कि यह ठीक है कि गम का एक दिन हँसी-ख़ुशी के एक माह से भी लम्बा होता है पर साथ ही यह भी ठीक है कि ख़ुशी का एक लम्हा भी ग़म के अंधेरे में डूबे दिल को रोशनी से भर सकता है। बाक़ी नियति से कौन पार पा सकता है, प्रारब्ध से कौन बच सकता है, अपना भाग्य कौन बदल सकता है? आपकी बात सीधी दिल की तलहटी से उठी मालूम होती है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. सत प्रतिशत सत्य! मैं आपके विचारों से सहमत हूँ सर

      Delete
  2. समय का प्रवाह किसी का इंतज़ार नहीं करता। सत्य कहा आपने, बहुत सुंदर और सार्थक सृजन।

    ReplyDelete
  3. व्यस्त मनुष्य का समय बहुत जल्दी बीतता है

    समय का प्रवाह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है ----बहुत अच्छी और गहरी पंक्तियां हैं कविता जी।

    ReplyDelete
  4. व्यस्त रखना बहुत आवश्यक है । सार्थक चिंतन ।

    ReplyDelete
  5. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (२४-०४-२०२१) को 'मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे'(चर्चा अंक- ४०४६) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    ReplyDelete
  6. सार्थक सृजन उदासी के गहरे भाव।

    ReplyDelete
  7. दुर्भाग्य उड़कर आता किन्तु पैदल वापस जाता है
    अभागे के हाथ में पारस भी पत्थर बन जाता है

    व्यस्त मनुष्य का समय बहुत जल्दी बीतता है
    समय का प्रवाह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है
    ....आज के दौर की सच्चाई बयान करने के साथ साथ, जीवन संदर्भ की सच्चाई बयान करती आपकी ये रचना अंतर्मन को छू गई।

    ReplyDelete
  8. सत्य का प्रवाह है हर छंद में ....
    आज की सच्चाई यही है जिसको आपने बाखूबी अपने अंदाज़ में बयाँ किया है ...

    ReplyDelete
  9. सार्थक और खूबसूरत सृजन

    ReplyDelete
  10. aapki pustak kindle par dekhunga.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Kindle पर नहीं है कविता कोश पर है,
      नीचे लिंक है ...
      http://kavitakosh.org/kk/otherapps/ebooks/?b=1QYp4X0XecFU_0EDBdIWAg9QrS_Gm9jl_

      Delete