सुख-शांति और ज्ञान-बुद्धि के दाता है गणपति जी - KAVITA RAWAT
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Thursday, September 13, 2018

सुख-शांति और ज्ञान-बुद्धि के दाता है गणपति जी

हमारी भारतीय संस्कृति में गणेश जी के जन्मोत्सव की कई कथाएं प्रचलित हैं। हिन्दू संस्कृति (कल्याण) के अनुसार भगवान श्रीगणेश के जन्मकथा का इस प्रकार उल्लेख है- “जगदम्बिका लीलामयी है। कैलाश पर अपने अन्तःपुर में वे विराजमान थीं। सेविकाएं उबटन लगा रही थी। शरीर से गिरे उबटन को उन आदि शक्ति ने एकत्र किया और एक मूर्ति बना डाली। उन चेतनामयी का वह शिशु अचेतन तो होता नहीं, उसने माता को प्रणाम किया और आज्ञा मांगी। उसे कहा गया कि बिना आज्ञा कोई द्वार से अंदर न आने पाए। बालक डंडा लेकर द्वारा पर खड़ा हो गया। भगवान शंकर अंतःपुर में आने लगे तो उसने रोक दिया। भगवान भूतनाथ कम विनोदी नहीं हैं, उन्होंने देवताओं को आज्ञा दी- बालक को द्वार से हटा देनी की। इन्द्र, वरूण, कुबेर, यम आदि सब उसके डंडे से आहत होकर भाग खड़े हुए- वह महाशक्ति का पुत्र जो था। इसका इतना औद्धत्य उचित नहीं फलतः भगवान शंकर ने त्रिशूल उठाया और बालक का मस्तक काट दिया।“ पार्वती ने जिस तपस्या से शिशु को प्राप्त किया उसके इस तरह जाने वे बहुत दुःखी हुई। उस समय भगवान विष्णु की सलाह से शिशु हाथी का सिर काटकर जोड़ दिया गया, जिससे वे जी उठे, लेकिन उनका शीश हाथी का होने से वे गणपति ‘गजानन‘ कहलाए। 
         भगवान गणेश के कई अवतारों की प्रचलित कथाओं सभी कथाओं पर यदि गहन विचार किया जाय तो एक बात जो समरूप दृष्टिगोचर होती है, वह यह कि गणेश जी ने समय-समय पर लोक जीवन में उपजी बुराईयों के पर्याय (प्रतीक) 'असुरों' की आसुरी शक्तियों का दमन कर लोक कल्याणार्थ अवतार लेकर सुख-शांति कायम कर यही सन्देश बार-बार दिया कि कोई भी बुराई जब चरम सीमा पर हो, तो उस बुराई का खात्मा करने के परियोजनार्थ जरुर कोई आगे बढ़कर उसे ख़त्म कर लोक में सुख-शांति, समृद्धि कायम करता है।  हर वर्ष लोक में व्याप्त ऐसी ही मोह, मद, लोभ, क्रोध, अहंकारादि असुरी शक्तियों की समाप्ति की मंशा लेकर लिए शायद हम गणेश चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की स्थापना कर उनसे ज्ञान-बुद्धि देते रहने और सुख-शांति बनाये रखने के उद्देश्यार्थ उत्साहपूर्वक पूजा-आराधना कर उनके कृपाकांक्षी बनना नहीं भूलते हैं।
       अगले वर्ष फिर से गणपति जी विराजमान हों, इसलिए प्रेम व श्रद्धापूर्वक बोले : "गणपति बप्पा मोरया, पुरछिया वर्षी लौकरिया"।
सभी ब्लॉगर्स और सुधि पाठकों को गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!

11 comments:

Anuradha chauhan said...

बहुत सुंदर 👌प्रथम पूज्य हे अष्टविनायक सबके विघ्नों को हरने वाले श्री गणेश को कोटि कोटि नमन🙏 गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

सुशील कुमार जोशी said...

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (14-09-2018) को "हिन्दी दिवस पर हिन्दी करे पुकार" (चर्चा अंक-3094) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हिन्दी दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Jyoti Dehliwal said...

बहुत बढ़िया, कविता दी। गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं...

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर = RAJA Kumarendra Singh Sengar said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अमर शहीद जतीन्द्रनाथ दास की पुण्यतिथि पर नमन : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 15 सितम्बर 2018 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा said...

अपने जीवन दर्शन में जितना महत्व और विविधता गणपति के चरित्र में है उतनी किसी में नहीं ... तमाम शक्तियों और श्रेष्ठ बुद्धि वाले गणपति प्रथम पूजित देवता का आगमन सुख समृद्धि का आगमन है ...
जय गणपति ... जय बप्पा ...

RAKESH KUMAR SRIVASTAVA 'RAHI' said...

सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।

Shoonya said...

आपको भी बिलम्बित गणेश चतुर्थी की शुभकामनाये।

Gyani Pandit said...

बहुत सुंदर कविता जी, गणपति बाप्पा मोरया

pexejurer said...

Amazing sharing, thanks for sharing with the online community. whatsapp sniffer Ogwhatsapp story saver