यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है - KAVITA RAWAT
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Friday, November 16, 2018

यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है

लम्बी उम्र सब चाहते हैं पर बूढ़ा होना कोई नहीं चाहता है
यौवन गुलाबी फूलों का सेहरा तो बुढ़ापा कांटों का ताज होता है

छोटी उम्र या कोरे कागज पर कोई भी छाप छोड़ी जा सकती है
युवा के पास ज्ञान तो वृद्ध के पास सामर्थ्य की कमी रहती है

बूढ़ा भालू धीमें-धीमें करके ही नाचना सीख पाता है
चालीस पार आदमी मूर्ख अथवा हकीम बन जाता है

बूढ़ी लोमड़ी को किसी शिक्षक की जरूरत नहीं होती है
सीखने-सिखाने की कोई उम्र निर्धारित नहीं की जाती है

चिड़िया की जवानी से गरुड़ पक्षी का बुढ़ापा भला
युवा की दासी बनने से वृद्ध की प्रेयसी बनना भला

10 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुन्दर

Anuradha chauhan said...

बहुत सुंदर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (17-11-2018) को "ओ३म् शान्तिः ओ३म् शान्तिः" (चर्चा अंक-3158) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Sudha Devrani said...

बहुत खूब... लाजवाब...

Meena sharma said...

वाह ! बहुत सुंदर !!!

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 17/11/2018 की बुलेटिन, " पंजाब केसरी को समर्पित १७ नवम्बर - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

विकास नैनवाल 'अंजान' said...

सुन्दर सूक्तियाँ।

Jyoti Dehliwal said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, कविता दी।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (26-11-2018) को "प्रारब्ध है सोया हुआ" (चर्चा अंक-3167) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Dr.Dayaram Aalok said...

"चिड़िया की जवानी से गरुड़ पक्षी का बुढ़ापा भला" इसी पंक्ति को सार्थक कर रहा हूँ!