बेईमानों की भीड़ में ईमानदार भी लगे बेईमान जैसे... - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

बेईमानों की भीड़ में ईमानदार भी लगे बेईमान जैसे...

कटुता कपट सहेजे मन में मुख पर मीठे बोल यहां।
घृणा द्वेष ने ओढ़ रखा है अपनेपन का खोल यहां।।
बिकते देखी है नैतिकता दो कौड़ी के मोल यहां।
बनी विद्वता धन की चेरी गधे खा रहे पंजीरी यहां।।
नियम, धर्म, सत का  हुआ अवसान हो जैसे।
मनुजता की कुटिलता बड़ी पहचान हो जैसे।।
छल कपट लोभ स्वार्थ का जाल फैला है ऐसे।
बेईमानों की भीड़ में ईमानदार लगे बेईमान जैसे।।
मातृ भूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभाना होगा।
धूमिल होता मुकुट भारती का चमकाना होगा।।
देश के जयचंदों को चुन चुन मार भगाना  होगा।
युवा शक्ति को आगे बढ़कर देश बचाना होगा।।
... राजेन्द्र गट्टानी