प्रतीक्षा का कुहासा
कविता रावत
अप्रैल 04, 2026
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पंख लगा उम्मीदों के, घर से मैं बाहर जाती हूँ, दिन भर के अंधियारों में, शाम ढले खो जाती हूँ। रात चुराती है यादें, स्वर्णिम सपनों की दुनिया ...
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