वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती...... - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, December 15, 2011

वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती......

जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती

चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती

मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती

कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती


कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

.........कविता रावत

146 comments:

  1. समाज का ईमानदार प्रतिबिम्ब।

    ReplyDelete
  2. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती
    Wah! Kya gazab kee rachana hai!

    ReplyDelete
  3. कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती
    Ye bhee panktiyan kamaal kee hain!

    ReplyDelete
  4. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
    पढ़ लिखकर अगर गाँव में ही उन्नति करते नए रोजगार लगाते गाँव छोड़कर शहर न भागते तो आज गाँव इतने वीरान न होते ...क्या कहने बहुत अच्छे भाव है पूर्ण कविता में !

    ReplyDelete
  5. bahut umdaa ,padh kar achhaa lagaa

    ReplyDelete
  6. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा ख़त्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती


    सचमुच दादी - नानी की कहानियाँ
    बच्चो की किलकारियाँ
    सब बातें पुरानी हो, कही खोती जा रही है !
    सुन्दर प्रस्तुति !

    ReplyDelete
  7. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    वाह , क्या खूब कहा है !

    कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा ख़त्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

    गाँव की उन्म्क्त हवा में किसानों के ठहाके गूंजते हैं
    यहाँ हंसने के लिए भी लोग , लाफ्टर क्लब ढूंढते हैं ।

    ग़ज़ल बहुत पसंद आई कविता जी ।

    ReplyDelete
  8. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    गाँव का यही रोना है, गाँव अब शहरी चकाचौंध में गम होते जा रहे हैनं .. ..आज के बच्चों को अब परियों का कहानियां अच्छी नहीं लगती ..दादी नानी कुछ खिलाये पिलाये तो ही बच्चे पास जाते है वर्ना कहानी तो वे सुनेगे नहीं टीवी पर कार्टून जो सबसे प्यारा लगता है....
    बहुत प्यारी उम्दा नए अन्दांज में बेहद मन भायी..धन्यवाद

    ReplyDelete
  9. बढ़िया सुन्दर....
    सादर...

    ReplyDelete
  10. mast likha hai yaar chhaa gaye guruuuuuuuuuuu.

    ReplyDelete
  11. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ...बधाई ऐसा ही कुछ मैंने भी लिखा है

    सजा करतीं थी चोपलें ,पुराने नीम के नीचे
    मगर अब गाँव मे उनके ,कोई चर्चे नहीं होते
    सुना करते थे हम किस्से ,हमारी दादी नानी से
    मगर अब तो बुजुर्गों के ठिकाने ही नहीं होते

    ReplyDelete
  12. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    सटीक लिखा है ...

    ReplyDelete
  13. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
    *
    ये दो पंक्तियां बहुत कुछ कहती हैं।

    ReplyDelete
  14. सचमुच दादी - नानी की कहानियाँ बच्चो की किलकारियाँ सारी बातें आज सिर्फ किताबों में ही रह गयी हैं, बचपन खो सा गया है, बचपन के पास भी अब अपने बचपन को जीने का वक़्त नहीं... सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  15. वाह! वाह! कविता जी बहुत सुन्दर कविता है आपकी.
    बहुत अच्छे भाव प्रस्तुत कियें हैं आपने.
    अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरा ब्लॉग आपका इंतजार करता रहता है.
    दर्शन दीजियेगा,प्लीज.

    ReplyDelete
  16. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती
    ...सच कहा आपने यदि दिल में जगह हो तो बीच में दीवार आ ही नहीं सकती...
    कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
    ..गाँव की एक कडुवी सच्चाई की जिन्दा तस्वीर जिसे हम पढ़े लिखे लोग बमुश्किल स्वीकारते हैं....
    सुन्दर प्रस्तुति....................!

    ReplyDelete
  17. बेहतरीन।

    सादर

    ReplyDelete
  18. कल 16/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  19. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    सटीक प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  20. कविता जी,..आपने बहुत सुंदर रचना लिखी,..बधाई .....

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....
    सपने में कभी न सोचा था,जन नेता ऐसा होता है
    चुन कर भेजो संसद में, कुर्सी में बैठ कर सोता है,
    जनता की बदहाली का, इनको कोई ज्ञान नहीं
    ये चलते फिरते मुर्दे है, इन्हें राष्ट्र का मान नहीं,

    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

    ReplyDelete
  21. बिल्कुल सही बात...।
    वर्तमान का सटीक वर्णन।

    ReplyDelete
  22. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    ....लाज़वाब...हरेक शेर अपने आप में बहुत कुछ कह गया...बहुत सटीक प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  23. अति सुन्दर रचना -शुभ कामनाएं.

    ReplyDelete
  24. हमेशा की तरह एक ईमानदार अभिव्यक्ति!!

    ReplyDelete
  25. एक बेहतरीन ग़ज़ल. बहुत बहुत आभार!

    ReplyDelete
  26. बहुत सुन्दर भावप्रणव अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  27. बेहतरीन गज़ल.

    सादर.

    ReplyDelete
  28. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    बहुत खूब! आज के दौर की सच्चाई है यह इसी धरज्ञतल से जुडी निम्न पंक्तियों पर भी जरा गौर फरमायें
    मुझे तलाश है
    रिश्तों की एक नदी की
    जो गुम हो गयी है
    कंक्रीट के उस जंगल में
    जहॉ स्वार्थ के भेडिये,
    कपट के तेंन्दुये,
    छल की नागिनों जैसे
    सैकडों नरभक्षी किसी भी
    रिश्ते को लील जाने को
    हरपल आतुर हैं
    इस अभ्यारण्य में
    मौकापरस्ती के चीते जैसे
    जंगली जानवर
    हर कंक्रीट की आड में
    घात लगाये बैठे हैं
    इसलिये मुझे लगता है
    कि रिश्तों की वह निरीह नदी कहीं दुबककर रो रही होगी
    याकि निवाला बन गयी होगी
    इन कंक्रीट के बासिंदों का,
    और अब प्यास बनकर
    उतर गयी होगी
    उन नरभक्षियांे के हलक में ? जाने क्यों ?
    फिर भी मुझे तलाश है
    रिश्तों की उस नदी की
    जो बीते दिनों में
    तब बिछड गयी थी मुझसे
    जब मैं शाम के खाने के लिये रोजगार की लकडियांॅ बीनने
    चला आया था
    इस कंक्रीट के जंगल में!
    .

    ReplyDelete
  29. वाह।
    क्‍या बात है....
    हर शेर लाजवाब।

    ReplyDelete
  30. khubsurat aur sarthak likha hai aapne....

    ReplyDelete
  31. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    बिलकुल सही कहा।

    ReplyDelete
  32. बहुत सुन्दर! हर पंक्ति लाजवाब!

    ReplyDelete
  33. बहुत सुन्दर प्रस्तुति । मेरे मए पोस्ट नकेनवाद पर आप सादर आमंत्रित हैं । धन्यवाद |

    ReplyDelete
  34. खुबसूरत अहसास ....! सच्चाई से रूबरू कराते हुए |

    ReplyDelete
  35. वाह!!! बेहतरीन, अदभुत

    www.poeticprakash.com

    ReplyDelete
  36. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    बिलकुल सही कहा...

    ReplyDelete
  37. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

    ReplyDelete
  38. बहुत बहुत अच्छी रचना...
    लाजवाब!!!!
    बधाई.

    ReplyDelete
  39. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    वाह ...बहुत लाजवाब!!!!

    ReplyDelete
  40. सारी के सारी रचना ही बहुत खूबसूरत है किसी एक पंक्ति को चुनपना मुनासिब ही नहीं सार्थ एवं सटीक ...बेहतरीन प्रस्तुति आज की ज़िंदगी के सच को बहुत ही खूबसूरती के साथ शब्दों से सजा दिया है आपने बहुत खूब ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

    ReplyDelete
  41. बेहद भाव पूर्ण ...अंतर तक स्पर्श करती अभिव्यक्ति....भाग दौड और विकास की अंधी दौड...कितना कुछ खो चुके हैं हम...कितना खोना और बाकी है...???
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभ कामनाएं

    ReplyDelete
  42. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    ReplyDelete
  43. बहुत ही अच्छा...

    ReplyDelete
  44. बेहद खुबसूरत अहसास ..बेहतरीन प्रस्तुती.....

    ReplyDelete
  45. जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
    हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती

    चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती
    ...बेहद खुबसूरत प्रस्तुति .

    ReplyDelete
  46. कविता जी, वाकई बहुत सुंदर

    कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    ReplyDelete
  47. हरेक लफ्ज़ काबिले- तारीफ़ है...:)

    ReplyDelete
  48. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
    ..अधिक पढ़ लिख कर भी गाँव को पढ़ पाना सरल काम नहीं रहा है अब .. .. गाँव के दर्द को सचित्र समझाना मन को छू गया..

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    ..शहर के नौनिहालों को यही सब भा रहा है ..क्या करे दादी नानियों की कहानियां सुनने में उनको कोई रूचि नहीं.....
    एक बुलंद स्वर में बहुत कुछ कह गयी यह रचना ....

    ReplyDelete
  49. badalte vaqt ki dhukhad tasveer... kaash naya bhi ho lekin purana hamse door na ho...

    ReplyDelete
  50. सुन्दर अभिव्यक्ति .....सफल प्रयाश

    ReplyDelete
  51. आपका पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  52. कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

    गजब की पंक्तियाँ लिखी है आपने ...बेहतरीन और लाजबाब

    ReplyDelete
  53. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती.

    बहुत सुंदर निष्कर्ष निकाला है आजकल के माहौल में बिग बोस के गाली गलौज समाज को क्या शिक्षा देते है जरूर विचार करने योग्य है.

    संवेदनशील प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  54. आपकी कविता दुबारा पढ़ी बहुत ही अच्छी लगी
    पर आप मेरे ब्लॉग पर नही आयीं,यह अच्छा नही लगा.

    एक महीने में बस एक पोस्ट ही लिखने की सोचा है
    उसपर भी आप जैसी प्रभु भक्त और प्रेमी न आयें,
    इससे मुझे बहुत निराशा होगी,कविता जी.
    मैं यह भी नही कह सकता की आप मुझ से नाराज हैं.

    मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैं आपके ब्लॉग की टिप्पणियों
    का अर्ध शतक पूरा कर रहा हूँ.मुझे बधाई देने ही आजाईयेगा न.

    आपको बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ,कविता जी.
    मेरी बातों का बुरा न मान लीजियेगा,प्लीज.

    ReplyDelete
  55. कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

    यह रचना संग्रह करने लायक है कविता जी !
    एक एक पंक्ति दिल में उतर गयी ....

    ReplyDelete
  56. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    .....सचमुच दादी - नानी की कहानियाँ
    बच्चो की किलकारियाँ
    सब बातें पुरानी हो, कही खोती जा रही है !
    सुन्दर प्रस्तुति !

    ReplyDelete
  57. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    .सटीक और असरदार सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  58. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती

    क्या बात है !
    बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल।

    ReplyDelete
  59. बेहतरीन बहुत सुंदर रचना,...

    नये पोस्ट की चंद लाइनें पेश है.....

    पूजा में मंत्र का, साधुओं में संत का,
    आज के जनतंत्र का, कहानी में अन्त का,
    शिक्षा में संस्थान का, कलयुग में विज्ञानं का
    बनावटी शान का, मेड इन जापान का,

    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

    ReplyDelete
  60. कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    poori ki poori rachna bahut khoobsooti ke saath aaj ke haalat ko bayan karti hai...!!

    ReplyDelete
  61. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती ...

    वाह कमाल का शेर कहा है आपने ... हकीकत बयान कर रहा है ...

    ReplyDelete
  62. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    बेहतरीन बहुत सुंदर रचना,...

    ReplyDelete
  63. बहुत खूब लिखा है आपने! उम्दा रचना! बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  64. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    ....अब तो बिगबॉस वाला ही जमाना आ गया है बेचारी दादी-नानी की कहानियाँ बहुत पुराणी हो चली है...
    बहुत शानदार रचना

    ReplyDelete
  65. अच्छी सच्ची रचना...बधाई

    नीरज

    ReplyDelete
  66. जी सच कहा कहकहे ही तो कम पड़ते गए त्रासद जिन्दगी में ...प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  67. ‘जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती’

    शायद इस मिसरे में तब्दीलियों की दरकार है कविताजी।

    ReplyDelete
  68. ekdam ekdam jhkkas wali kavita sach me apne aage aane wali peedhi ko dadi nani k pyar se hi bada krna hia :)

    ReplyDelete
  69. सुंदर प्रस्तुति,....
    मेरे पोस्ट के लिए "काव्यान्जलि" मे click करे

    ReplyDelete
  70. sunder abhivykti .
    vyastata to kabhee aswasthta hee tatsthata ka karan rahee .
    aaj irada hai sabhee puranee rachanae jo choot gayee hai unhe bhee padne ka.

    ReplyDelete
  71. बिलकुल जीवन की सत्यता को उजागर करती पोस्ट.... सुंदर बहुत ही विचारनीय पोस्ट. जीवन की कडवी हकीकत कहती हुई. .... सुंदर प्रस्तुति.प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  72. बहुत उम्दा रचना..

    ReplyDelete
  73. वर्तमान परिवेश और परिस्थितियों पर सटीक काव्यात्मक टिपण्णी !
    कविता बहुत सुंदर बन पाई है. बधाई !

    ReplyDelete
  74. कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती
    भाव पूर्ण बेहतरीन रचना

    ReplyDelete
  75. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती ...

    वाह कमाल का शेर कहा है आपने ...
    बेहतरीन रचना

    ReplyDelete
  76. चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती
    Wah! Kya gazab kee rachana hai.

    ReplyDelete
  77. सुंदर प्रस्तुति,....

    ReplyDelete
  78. ब्लॉग बुलेटिन की इस ख़ास पेशकश :- २०११ के इस अवलोकन को मैं एक पुस्तक का रूप दूंगी , लिंकवाली पूरी रचना होगी ... यदि आप में से किसी को आपत्ति हो तो यहाँ या फिर मेरी ईमेल पर स्पष्ट कर दें ... और हाँ किसी को यह पुस्तक उपहार स्वरुप नहीं दी जाएगी ....अतः इस आधार पर निर्णय लें ... मेरा ईमेल है :- rasprabha@gmail.com .

    ReplyDelete
  79. मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
    जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती

    कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
    मेरा शौक
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है,नई रोशनी में सारा जग जगमगा गया |
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.
    * नया साल मुबारक हो आप सभी को *

    ReplyDelete
  80. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती


    बेहद खूबसूरती से कही गई जिंदगी की ये सच्चाई ...वाह बहुत खूब

    आने वाला नववर्ष आपके और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो

    ReplyDelete
  81. कुछ तो होता होगा असर दुआओं का भी
    सिर्फ दवाओं से ठीक बीमारियाँ नहीं होती
    बहुत खूब और चित्र देख अपने गाँव के घर की याद आ गई ! आपको भी नव-वर्ष २०१२ की हार्दिक शुभकामनाये !

    ReplyDelete
  82. एक से बड कर एक ....

    चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती||

    नव-वर्ष की शुभकामनाएँ |

    ReplyDelete
  83. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

    ReplyDelete
  84. aapke blog par pahli baar aa rahi hoon aur bahut prabhavit hui hoo. aapki is gajal ka ullekh maine apne blog me bhi kiya hai.aapko saparivaar nav varsh ki subhkaamna .

    ReplyDelete
  85. Naye saal kee anek shubh kamnayen!

    ReplyDelete
  86. कविता जी बहुत सुन्दर रचना , सुन्दर भाव, बेहतरीन पंक्तियाँ
    मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
    जिसमें कभी न आंच और न चिंगारियाँ होती

    कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती

    ReplyDelete
  87. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
    vikram7: आ,साथी नव वर्ष मनालें......

    ReplyDelete
  88. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  89. वाह कविता जी ! बहुत सुंदर ग़ज़ल है ! हर शेर बेहतरीन !
    आपको नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएँ !

    ReplyDelete
  90. नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

    ReplyDelete
  91. आपको और परिवारजनों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  92. नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  93. समय बदल गया ,
    लोग बदल गये ,
    सोच बदल गयी ,

    नही बदला तो ,
    मन जो व्याकुल है
    भारत और इंडिया के जंजाल मे ,

    इंडिया पाश्चात संस्कृति का अदभुत चेहरा है
    जहाँ व्यबसाय और गुंडो का पहरा है ,

    भारत मे जहाँ समाज है
    उसकी लूट मे सब बर्बाद है

    क्योंकि मुझे मेरे भारतीय होने पर गर्व है और हमारा नववर्ष पतझड़ में नहीं वसन्त ऋतु में आता है इस बार स्वदेशी नववर्ष विक्रमी सम्वत- 2069 , अंग्रेजी केलेंडर के अनुसार 22 मार्च 2012 (वीरवार), गुरुवार शाम 07 :10 बजे शुरू हो रहा है और हम बड़ी धूम धाम से 22 मार्च को वसन्त ऋतु में अपना नववर्ष मनाएँगे !

    ReplyDelete
  94. पहली बार आपका ब्लौग देखा। आपके द्वारा रचित कवितायें बहुत अच्छी लगीं ।
    नव वर्ष की शुभ कामनायें । अनुराग तिवारी

    ReplyDelete
  95. जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
    हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती

    चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था
    मुनासिब हरेक को चार दीवारियाँ नहीं होती
    बहुत खूब गजब रचना..
    नए साल की शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  96. कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
    वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
    बहुत बढ़िया रचना
    नए साल के हार्दिक शुभकामना..

    ReplyDelete
  97. बेहतरीन रचना।
    नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें.......

    ReplyDelete
  98. नव वर्ष मंगलमय हो !
    बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ....

    ReplyDelete
  99. "जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
    हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती"
    बहुत खूब ! कडवी हकीकत बयान करती सुंदर कविता।

    ReplyDelete
  100. आपको व आपके परिवार को नववर्ष की शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  101. आपको भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!
    आभार !

    ReplyDelete
  102. आपको व आपके परिवार को नववर्ष की शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  103. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नव वर्ष की शुभकामनायें|

    ReplyDelete
  104. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  105. आपको एवं आपके परिवार को नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  106. ati samvedan sheel rchna hae ......... jivan ki anekanek dushvariyan hi to jivan ke sahi arth smjha jati haen .bdhai

    ReplyDelete
  107. बहुत सुंदर रचना...
    आपको एवं आपके परिवार को नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  108. बेहतरीन रचना।
    आपको व आपके परिवार को नववर्ष की शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  109. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

    ReplyDelete
  110. "जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती
    हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती"
    बहुत खूब ! जिंदगी के कठिन राहों से गुजरने वालों की ही आखिर में पूछ परख होती है... ..
    मैडम आपको और पूरे परिवार को नए साल की शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  111. एक से बढ़कर एक पन्तियाँ बहुत सुंदर रचना,....

    WELCOME to new post--जिन्दगीं--

    ReplyDelete
  112. आपको एवं आपके परिवार को नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  113. Kavita ji ..nav varsh par hardik mangal kaamnayen... aur yah rachna bhi hamesha kee tarah umda.. she'r lajwaab

    ReplyDelete
  114. बहुत ख़ूबसूरत....हर शेर उम्दा......दाद कबूल करे|

    ReplyDelete
  115. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  116. नव वर्ष मंगलमय हो
    बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें

    ReplyDelete
  117. बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति,बढ़िया प्रस्तुति,....
    welcome to new post--जिन्दगीं--

    ReplyDelete
  118. काश कि वो कहकहा लगे और सन्नाटा टूटे....

    नववर्ष शुभ हो!!

    ReplyDelete
  119. Hello from France
    Thanks to your comment on my blog, I discovered yours
    But I find it hard to read! if you write Hindi, google, translation, I could read, like right now on your site
    A translator is not 100% effective but it can play all the same and understand.
    I am delighted that India visit my blog.
    You put a very fine text on Bhopal, it was a great world tragedy.
    Here in France we had two hours of television for this city and especially that there are still risks.
    The planet is really sick because of the human being.
    I wish you a very pleasant day especially since it is the w-end, the rest does not hurt
    kisses
    Chris
    my sites
    http://sweetmelody87.blogspot.com/
    http://joyeux-noel-sweetmelody.blogspot.com/

    a small gift for you
    http://nsm01.casimages.com/img/2009/03/04//090304073147505743259268.jpg


    फ्रांस से नमस्ते
    मेरे ब्लॉग पर अपनी टिप्पणी के लिए धन्यवाद, मैं तुम्हारी खोज
    लेकिन मैं यह मुश्किल पढ़ने के लिए मिल! यदि आप हिन्दी लिखने के लिए, गूगल, अनुवाद, मैं, की तरह अपनी साइट पर अभी पढ़ सकता है
    एक अनुवादक नहीं 100% प्रभावी है, लेकिन यह सब एक ही खेलते हैं और समझ सकते हैं.
    मैं खुश हूँ कि भारत अपने ब्लॉग पर जाएँ.
    आप भोपाल पर एक बहुत ही सुन्दर पाठ कहें, यह एक महान दुनिया त्रासदी थी.
    यहाँ फ्रांस में हम इस शहर के लिए टेलीविजन के दो घंटे की थी और विशेष रूप से वहाँ अभी भी जोखिम है कि.
    ग्रह वास्तव में इंसान की वजह से बीमार है.
    मैं एक बहुत ही सुखद दिन आप चाहते हैं, खासकर के बाद से यह w के अंत है, बाकी चोट नहीं करता है
    चुम्बन
    क्रिस
    मेरे साइटों
    http://sweetmelody87.blogspot.com/
    http://joyeux-noel-sweetmelody.blogspot.com/

    तुम्हारे लिए एक छोटा सा उपहार
    http://nsm01.casimages.com/img/2009/03/04//090304073147505743259268.jpg

    ReplyDelete
  120. namaskar kavita ji
    bahut khoob .accha likha aapne .bhopal gas kand ki yaad punah taza ho gayo .woh manjar bahut bhayanak tha .........! sunder prastuti .
    mere blog par aapka swagat hai ....:)

    ReplyDelete
  121. देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती
    कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती
    वाह जी! बहुत खूब कही आपने...
    नववर्ष शुभ मंगलमय हो!!

    ReplyDelete
  122. har sher bahut anokha aur khaas...

    देखते हैं बिगबॉस की कहानियाँ बच्चे टीवी पर
    शायद घरों में अब वे दादी-नानियाँ नहीं होती

    कोई कहकहा लगाओ के अब सन्नाटा खत्म हो
    एक-दो बच्चों से अब किलकारियाँ नहीं होती

    shubhkaamnaayen.

    ReplyDelete
  123. ek jagruk nagrik ki soch apki kavita me ubharti hai.

    ReplyDelete
  124. bahot khub ,bahot hi sndar chitran hai :))

    ReplyDelete
  125. बहुत बढ़िया रचना ।
    मेरी रचना भी देखें ।
    मेरी कविता:मुस्कुराहट तेरी

    ReplyDelete
  126. बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति.
    नव वर्ष मंगलमय हो

    ReplyDelete
  127. हार्दिक शुभकामनायें..

    ReplyDelete
  128. बहुत अच्छी सुंदर प्रस्तुति,बढ़िया अभिव्यक्ति रचना अच्छी लगी.....
    new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....

    ReplyDelete
  129. बहुत खूब कविता रावत जी बेहतरीन रचना व्यंग्य करती आज के परिवेश और सामाजिक बुनावट पर .

    ReplyDelete
  130. bahut achha likha hai.. achha laga blog padh kar ke...
    happy new year 2012

    ReplyDelete
  131. It is a pleasure for me to know your interesting blog. Happy New Year & Hugs from Argentina.

    ReplyDelete
  132. आपकी यह बेहतरीन रचना शुकरवार यानी 11/01/2013 को

    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जाएगी…
    इस संदर्भ में आप के सुझाव का स्वागत है।

    सूचनार्थ,

    ReplyDelete

  133. एक ही शब्द निकल रहा बस वाह! वाह!!
    बहुत शानदार रचना .....

    ReplyDelete
  134. बहुत गहन भाव लिए गजल .एक एक शेर दिल को छू गया .बधाई
    New post : दो शहीद

    ReplyDelete
  135. बहुत शानदार रचना!

    ReplyDelete