मेरी बगिया में उत्तराखंड का औषधीय सुरक्षा चक्र: कंडाली (बिच्छू घास) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 16 मार्च 2025

मेरी बगिया में उत्तराखंड का औषधीय सुरक्षा चक्र: कंडाली (बिच्छू घास)



क्या आप जानते हैं कि हमारे बगीचे में लहलहाते हरी चाय (ग्रीन टी) के ये पौधे दरअसल क्या हैं और इन्हें कैसे उगाया जाता है? आइए, आज मैं आपको अपनी बगिया के एक बेहद खास और बहुउद्देशीय पौधे से मिलवाती हूँ।
     इन पौधों को हम विशेष रूप से अपने पहाड़ी राज्य उत्तराखंड से बीज लाकर लाए हैं। यह महज़ एक पौधा नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का अनमोल खजाना है।
परिचय और वानस्पतिक पहचान
इसे उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में कंडाली और कुमाऊँ में सिसूण कहा जाता है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में लोग इसे बिच्छू घास के नाम से जानते हैं। 
  • वानस्पतिक नाम: अर्टिका पर्वीफ्लोरा (Urtica parviflora)
  • परिवार: अर्टिकाकेई (Urticaceae)
  • अंग्रेजी नाम: नेटल (Nettle)
     इसकी पत्तियों और तनों पर बारीक रोएं होते हैं, जिनमें फॉर्मिक अम्ल (Formic Acid) पाया जाता है। यही कारण है कि इसे असावधानी से छूने पर लाल चींटियों के काटने जैसी तेज जलन और सूजन हो जाती है।
परंपरा और स्वाद का संगम
     जहाँ उत्तरी और पूर्वी यूरोप में इसके सूप (Nettle Soup) का चलन है, वहीं हमारे उत्तराखंड में सदियों से कंडाली का साग कोदो (मडुआ) की रोटी, भात (चावल) और झंगोरा के साथ चाव से खाया जाता है। औषधीय गुणों के कारण यह हमारे पहाड़ी खान-पान का एक अभिन्न हिस्सा है।
स्वास्थ्य के लिए 'रामबाण' औषधीय गुण
     विटामिन ए, सी, डी, पोटैशियम, मैंगनीज, कैल्शियम और आयरन से भरपूर यह पौधा कई बीमारियों में अचूक दवा का काम करता है:
  1. दोष निवारण: यह शरीर के पित्त दोष और पेट की गर्मी को शांत करता है।
  2. दर्द और मोच में राहत: चोट या मोच वाले स्थान पर इसकी पत्तियों का अर्क लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
  3. मलेरिया और जकड़न: एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण इसका साग मलेरिया और शारीरिक जकड़न को दूर करता है।
  4. कैंसर अनुसंधान: इसके बीजों का उपयोग कैंसर रोधी दवाएं बनाने में भी किया जाता है।
भोपाल की गर्मी में पहाड़ों की कंडाली को सहेजना
     यह पौधा भारत, चीन और यूरोप सहित कई देशों में पाया जाता है, लेकिन आज ग्लोबल वार्मिंग और मौसम के बदलते मिजाज के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है।
     पहाड़ों की ठंडी वादियों के इस नाजुक पौधे को भोपाल की भीषण गर्मी में बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसे तेज धूप से बचाने और अत्यधिक पानी देने की आवश्यकता होती है। गर्मियों में इसके ऊपरी तने और पत्तियां भले ही सूख जाएं, लेकिन यदि इसकी एक छोटी सी जड़ भी सुरक्षित रह जाए, तो मानसून की पहली बौछार पड़ते ही यह दोबारा पूरी जीवंतता के साथ मुस्कुरा उठता है।
बगिया का अनोखा 'सुरक्षा चक्र' और हमारी सीक्रेट 'ग्रीन टी'
     हमने इस पौधे को विशेष रूप से अपने बगीचे की बाहरी सीमा (सड़क किनारे) लगाया है, जिसके दो बड़े फायदे हैं:
  1. कोई भी आवारा जानवर इसे चर नहीं पाता।
  2. रास्ते से गुजरने वाले उपद्रवी लोग डर के मारे हमारे बगीचे के पौधों से छेड़छाड़ करने की हिमाकत नहीं करते। इस तरह यह हमारी बगिया के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच बन गया है।
     हमारी घरेलू ग्रीन टी: हम इसकी पत्तियों को लेमन ग्रास और तुलसी के पत्तों के साथ सुखाकर, पीसकर एक बेहतरीन और ताज़ा 'होममेड ग्रीन टी' तैयार करते हैं।
अपनों के साथ साझा होती खुशियाँ
पिछले चार वर्षों से हम इसे भोपाल में उगा रहे हैं। सर्दियों के मौसम में जब कंडाली अपने पूरे शबाब पर होती है, तब भोपाल में रहने वाले हमारे कई उत्तराखंडी भाई-बहन और स्थानीय परिचित इसके स्वाद और सेहत के फायदों (जैसे फोरमिक एसिड, एसिटिलकोलाइन और विटामिन-ए) के कारण हमारे घर इसका साग खाने और पत्तियां मांगने आते हैं। हम न केवल उन्हें इसका स्वादिष्ट साग खिलाते हैं, बल्कि उनके घरों के लिए कंडाली के पौधे देकर इसकी देखरेख के गुर भी सिखाते हैं।

....कविता रावत 





12 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 23 अगस्त 2022 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 23 अगस्त 2022 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Sudha Devrani ने कहा…

कमाल कर दिया आपने तो आ.कविता जी !भोपाल में ही गढ़वाल ले गये ..कण्डाली के बीज गमले में उगा लिये ! आश्चर्यचकित हूँ मैं तो... मुझे लगता है कि कुछ चीजे हम सिर्फ अपने उत्तराखंड जाकर ही पा सकते हैं और आपने तो....
कण्डाली का साग ही नहीं ग्रीन टी भी ! ये तो पहली बार सुन रही।नमन है आपकी सन्नद्धता को
🙏🙏🙏🙏

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कलमंगलवार (21-8-22} को "मेरे नैनों में श्याम बस जाना"(चर्चा अंक 4530) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा

Abhilasha ने कहा…

बहुत खूब कविता जी बढ़िया जानकारी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नई जानकारी मिली । अच्छी पोस्ट ।।

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी।

जिज्ञासा सिंह ने कहा…

कंडाली के विषय में उपयोगी जानकारी। आभार आपका ।

Bharti Das ने कहा…

बहुत सुंदर, औषधीय गुणों से भरपूर आलेख

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

आप सौभाग्यशालिनी भी हैं तथा परोपकारी भी। बहुत अच्छा लगा पढ़कर।

Gajendra Bhatt "हृदयेश" ने कहा…

बहुत सुन्दर व ज्ञानवर्धक प्रस्तुति!

बेनामी ने कहा…

Nice post thank you Theresa

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