दूध में उफान आने पर वह चूल्हे पर जा गिरता है।
नम्र व्यक्ति अपनी नम्रता धूर्त व्यक्ति से सीखता है।।
नम्र बनने के लिए कोई मोल नहीं चुकाना पड़ता है।
हमेशा तराजू का वजनदार पलड़ा ही झुकता है।।
जो पेड़ झुक गया वह तूफान से बच निकलता है
वह पेड़ कभी टूटता नहीं जो लचकदार होता है।।
शालीनता से अपमान सहन नहीं करना पड़ता है।
हरेक वृक्ष नहीं झुकता फलवाला वृक्ष ही झुकता है।।
शालीनता से अपमान सहन नहीं करना पड़ता है।
हरेक वृक्ष नहीं झुकता फलवाला वृक्ष ही झुकता है।।
.... कविता रावत


19 टिप्पणियां:
Bahut sundar satya ke sath
जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 09/08/2016 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।
सटीक ।
नम्रता को बहुत ही अच्छे से रेखांकित किया है आपने। बधाई।
विनम्रता व शालीनता बिना मोल के भी बहुत कुछ खरीद सकती है । उत्तम...
विनम्रता व शालीनता बिना मोल के भी बहुत कुछ खरीद सकती है । उत्तम...
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कलमंगलवार (09-08-2016) को "फलवाला वृक्ष ही झुकता है" (चर्चा अंक-2429) पर भी होगी।
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मित्रतादिवस और नाग पञ्चमी की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सुंदर रचना..कविता जी
एक नई दिशा !
Wow....you are great kavita ji...!!!
No matter how great you have to convince.
.
""Namrata"" jab nadi mebadh aati hai...to sab se pahle sidhe rahne wLe pedh bah jate hai....aur jhukne wale usi sthiti me rahate hai....vidya bhi vinay....se hi shobha deti hai.
Thanks you so much kavita ji.
9545717766 my whats app number.
Aap ki post ko main aur prasidhha karna chahta hun.
वाह, बहुत खूब।
नीतिपूर्ण उक्तियाँ .
नीतिगत पंक्तियाँ। (हरेक वृक्ष नहीं(,) फलवाला वृक्ष ही झुकता है)में अर्द्धविराम की आवश्यकता महसूस हुयी।
बहुत सुंदर और सटीक रचना
बहुत सुंदर, झुकना टूटने से भी बचाता है।
अनुकरणीय युक्तियों को बाखूबी शब्दों में उतारा है ... सच है की नम्रता और विनम्रता इंसान को ऊंचा उठाती है न की नीचा ... झुकने में कोई बुराई नहीं है ...
अच्छी सीख देती हुई पंक्तियाँ ,कविता के रूप में इस प्रकार के सन्देश देना एक सार्थक प्रयास है.
Very beautiful Kavita Ji, and good thought above from Asha Joglekar also. I am also from Uttrakhand and lives in Manali. Keep it touch.
बहुत सुंदर...
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