जन-जन के मन में तू ही बसा!
जय बिरसा! जय बिरसा!
तेरा नाम अमर रहेगा!
धरती पर उपकार सदा रहेगा!
खूंटी की माटी ने पाला
संघर्षों में जीवन डाला।
खूंटी की घाटी, बचपन बीता,
ज्ञान-संस्कार का दीप जला।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
शोषण देखा, पीड़ा पाई,
क्रांति की राह उन्होंने अपनाई।
लगान की मार, वन की लूट,
अंग्रेजी शासन बना था शूल।
तब उठी प्रतिशोध की ज्वाला,
बिरसा ने लिया संकल्प निराला।
"धरती आबा" बनकर बोले,
जन-जन को नव विश्वास खोले।,,
एक ईश्वर की पूजा सिखाई,
अंधविश्वास की जड़ मिटाई।
सत्य, शुद्धि, अहिंसा का पाठ,
संगठन बना, बढ़ाया साथ।
मुंडा-राज का सपना देखा,
गुलामी को खुला ललकारा।,
तीर-कमान, फरसे-ढाल,
वीर उतरे रण में तत्काल।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
चाईबासा, रांची, खूंटी,
गूंज उठी विद्रोह की गूँजी।
डोम्बारी पर रण हुआ भारी,
रक्त बहा, पर न हारी बारी।
बंदी बने, जेल में डाले,
क्रांति की मशाल न बुझने वाले।
9 जून को प्राण त्यागे,
पर जन-जन के दिल में जागे।
शहीद हुए, अमर बन गए,
भगवान बन जनमन में छाए।
आज भी उनकी गूंज सुनाई,
आदिवासी को राह दिखाई।
पहला सेनानी, गौरव गाथा,
जय बिरसा! तेरा है साथा।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
जय बिरसा! जय बिरसा!
धरती पर उपकार सदा रहेगा!
खूंटी की माटी ने पाला
संघर्षों में जीवन डाला।
खूंटी की घाटी, बचपन बीता,
ज्ञान-संस्कार का दीप जला।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
शोषण देखा, पीड़ा पाई,
क्रांति की राह उन्होंने अपनाई।
लगान की मार, वन की लूट,
अंग्रेजी शासन बना था शूल।
तब उठी प्रतिशोध की ज्वाला,
बिरसा ने लिया संकल्प निराला।
"धरती आबा" बनकर बोले,
जन-जन को नव विश्वास खोले।,,
एक ईश्वर की पूजा सिखाई,
अंधविश्वास की जड़ मिटाई।
सत्य, शुद्धि, अहिंसा का पाठ,
संगठन बना, बढ़ाया साथ।
मुंडा-राज का सपना देखा,
गुलामी को खुला ललकारा।,
तीर-कमान, फरसे-ढाल,
वीर उतरे रण में तत्काल।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
चाईबासा, रांची, खूंटी,
गूंज उठी विद्रोह की गूँजी।
डोम्बारी पर रण हुआ भारी,
रक्त बहा, पर न हारी बारी।
बंदी बने, जेल में डाले,
क्रांति की मशाल न बुझने वाले।
9 जून को प्राण त्यागे,
पर जन-जन के दिल में जागे।
शहीद हुए, अमर बन गए,
भगवान बन जनमन में छाए।
आज भी उनकी गूंज सुनाई,
आदिवासी को राह दिखाई।
पहला सेनानी, गौरव गाथा,
जय बिरसा! तेरा है साथा।
धरती आबा! जय हो बिरसा!
जन-जन के मन में तू ही बसा!
जय बिरसा! जय बिरसा!
तेरा नाम अमर रहेगा!
धरती पर उपकार सदा रहेगा
धरती पर उपकार सदा रहेगा
... कविता रावत

2 टिप्पणियां:
जन जन के नायक बिरसा के जीवन और आदर्शों के बारे में सुंदर कृति!!
यह रचना पढ़ते हुए मन अपने आप गर्व से भर जाता है। आपने बिरसा मुंडा को इतिहास की किताब से निकालकर ज़िंदा इंसान बना दिया है। शब्दों में जो जोश है, वही उनके संघर्ष की असली पहचान है। शोषण के खिलाफ उनकी आवाज़ आज भी उतनी ही सटीक लगती है। आदिवासी अस्मिता, प्रकृति प्रेम और संगठन की ताकत आपने बहुत सहज ढंग से रखी है।
एक टिप्पणी भेजें