नव वर्ष मंगल गान। ऐसा हो नूतन वर्षाभिनंदन - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

शनिवार, 27 दिसंबर 2025

नव वर्ष मंगल गान। ऐसा हो नूतन वर्षाभिनंदन


कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन

हर घर आँगन खुशियाँ छाएँ, झूमे सारा आँगन,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन।

न रहे बैर, न रहे द्वेष, टूटे जात की बेड़ी,
नफरत वाली गिरें दीवारें, ऊँची हो या टेढ़ी।
प्रेम की गंगा बहे जगत में, महके सारा जीवन
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन...

छोड़ें स्वार्थ और संकीर्णता, श्रेष्ठ मार्ग अपनाएँ,
मिटे बुराई इस दुनिया से, सद्भाव के गीत सुनाएँ।
मधुर गान से गूँज उठे, ये धरती और गगन,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन...

सदाचरण का दीप जलाएँ, मिटे घमंड का साया,
धन-बल और ये बुद्धि-बल, सब है आनी-जानी माया।
शालीनता की जोत जले, और हटे अनैतिक तम-मन,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन...

मरुथल में संवेदना फूटे, मन में हो उदारता,
त्याग और सहयोग बढे, और फैले प्रेम सरसता।
विरोध-विग्रह दूर भगाएँ, सुखी हो जन-जन,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन...

बीज गले तो वृक्ष बने, परमार्थ से सृजन जगाएँ,
दुःख हो या सुख, समभाव से सबको गले लगाएँ।
मंगल गान हो घर-घर में, पावन होवे मन,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन...

हो... कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन,
हर घर आँगन में रहे खुशहाली,
कुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदन।

... कविता रावत 

Happy New year 

कोई टिप्पणी नहीं: