नूतन वर्ष का संकल्प यही,
स्वदेशी की लौ जगे हर कहीं।
भारत का गान गूंजे जग में,
अपनत्व रहे सदा मन में।
स्वदेशी की लौ जगे, हर घर के द्वार पर,
अभिमान हो हमें अपनी, विरासत और सार पर।
न हो पश्चिम का मोह, न पराई कोई प्यास,
अपनी जड़ों से जुड़कर ही, होगा पूर्ण विकास।
भाषा में मिठास रहे, व्यवहार में सम्मान,
पूरी दुनिया में गूंजे, मेरे भारत का गान।
रिश्तों की क्यारियों में, बढ़ता रहे आनंद,
अक्षय रहे सदा यहाँ, अपनत्व का ये मकरंद।
... कविता रावत


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