पतझड़ सा जीवन
कविता रावत
नवंबर 08, 2009
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आम्रकुन्जों के झुरमुट से बहती कल-कल मंद पवन, पर उदास मैं बैठी हूँ, दिखता हर तरफ सूनापन। देख हरीतिमा इन बागों की, कहता मुझसे पतझड़ मन— ...
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