सूर्योपासना का पर्व है मकर संक्रांति - KAVITA RAWAT
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Thursday, January 14, 2016

सूर्योपासना का पर्व है मकर संक्रांति

हमारे भारतवर्ष में मकर संक्रांति, पोंगल, माघी उत्तरायण आदि नामों से भी जाना जाता है। वस्तुतः यह त्यौहार सूर्यदेव की आराधना का ही एक भाग है। यूनान व रोम जैसी अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी सूर्य और उसकी रश्मियों को भगवान अपोलो और उनके रथ के स्वरूप की परिकल्पना की गई है। अपोलो मतलब ऊष्मा, प्रकाश तथा स्वास्थ्य व उपचार के देवता। अर्थात् जब से मानव में समझ का विकास हुआ, तब से ही उसे यह भी स्पष्ट आभास हो गया कि सूर्य इस धरती के नियंताओं में सर्वोपरि है। सूर्य का उत्तरायण होना एक खगोलीय घटना भर नहीं है। संक्रांति पर पर्व और उल्लास की परम्परा शायद मानव जाति की ओर से सूर्यदेव को धन्यवाद ज्ञापन है अथवा शायद हर नई पीढ़ी को हमारे पुरखों की नैसर्गिक विद्वता में लिपटा संदेश है, जिसे उन्होंने गहन अनुभव शोधन से समझा था। 
          मकर संक्रांति आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व है। इसी दिन सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है। इसी दिन उत्तरायण शुरू होता है, अभी तक दक्षिणायण रहता है। खगोलीय दृष्टि से भी यह बहुत महत्वपूर्ण दिन है। पुराणों में कहा गया है कि दक्षिणायण देवताओं की रात और उत्तरायण देवों के लिए दिन माना जाता है। यह दिन दान, पूजा-हवन, यज्ञ करने के लिए सर्वाधिक श्रेष्ठ है। मकर संक्रांति से सम्बंधित कई कथाएं है- एक समय दुर्वासा ऋषि कौरव-पांडव के गुरु द्रोणाचार्य के आश्रम में समिधा की खोज में पहुंचे। उस समय उनकी पत्नी कृपी आश्रम में थी। कृपी ने ऋषि से निवेदन किया कि संतान प्राप्ति का कोई उपाय बताएं।दुर्वासा ने कहा कि वह मकर संक्रांति को स्नान कर सूर्य की उपासना करें। कृपी ने ऐसा ही किया तो उन्हें अश्वथामा जैसा प्रतापी पुत्र प्राप्त हुआ। एक अन्य कथा के अनुसार यशोदा ने जब कृष्ण जन्म का व्रत लिया तो सूर्य की गति उत्तरायण में आरम्भ हुयी थी और उस दिन मकर संक्रांति थी।भीष्म पितामह ने उत्तराणी सूर्य होने के कारण इसी दिन प्राण त्यागे। पितरों के लिए 16 दिन तर्पण करने से जो शास्त्रोक्त फल प्राप्त होता है उतना पुण्य मकर संक्रांति के दिन तर्पण करने से मिलता है।
          इस माह कहीं पूर्णिमा से माह की शुरुआत होती है तो कहीं मकर संक्रांति से होती है। मकर राशि में सूरज जिस दिन प्रवेश करता है, उसे सौरमान कहते हैं। यह दिन अच्छा पुण्यकाल माना जाता है इसलिए किसी नदी में आह्वान करके स्नान करने का विधान है। पद्मपुराण में उल्लेख है कि भगवान विष्णु ने इस दिन असुरों का वध करके, नाश करके भूमि पर शांति स्थापित की थी। अधर्म का नाश हुआ और धर्म की प्रतिष्ठा हुई इसलिए इसे मुख्य पर्व माना गया। मकर संक्रांति पर सूरज की पूजा, अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और नदी स्नान करना चाहिए। नई फसल का दान करना चाहिए। अन्य पर्वों का उद्देश्य होता है कि खा-पीकर खुश हो जाना, जबकि मकर संक्रांति पर दान करके आनन्द प्राप्त किया जाता है। स्मृतियों में कहा गया है कि जो आप कमाई करते हैं, उसका दो फीसदी धर्म कार्यों के लिए खर्च करना चाहिए, जो पूरे साल राशि संचित की है, उसको मकर संक्रांति पर खर्च करना चाहिए। अर्थात् 12 माह में जुटाई गई 24 फीसदी कमाई का दान करना चाहिए। इससे दान पाने वाले गरीब का जीवन सुधरता है। धनी लोगों का पैसा निचले तबके के लोगों के पास जाता है जिससे उनके धन में भी वृद्धि होती है। इस दिन तेल से स्नान करना, तिल का दान करना, तिल से होम करना, तिल को जल में मिलाकर तर्पण करना, तिल को खाना और खिलाना श्रेयस्कर माना गया है। श्राद्ध के दौरान तो तिल में होम करते हैं, तर्पण नहीं करते हैं। इसलिए यह पर्व खास है। पूर्वजों के लिए यह पर्व अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है। तिल का उपयोग सभी पापों से मुक्त कराता है। मकर संक्रांति जैसे पर्वों के बारे में नई पीढ़ी को संस्कारित किया जाना चाहिए। इसके लिए सामूहिक आयोजन कर उन्हें इसके महत्व की जानकारी देनी चाहिए। पूर्व में हर गांव, शहर, नगर में ऐसे आयोजन होते थे, अब नहीं होते हैं इसलिए ऐसे पर्वों के संस्कार पीछे छूट गए हैं।          
अथर्ववेद की ऋचा कहते है-  आभारिषं विश्वभेषजीमस्यादृष्टान् नि शमयत्।  अर्थात्, सूर्य किरणें सर्वरोगनाशक हैं। वे रोगकृमियों को नष्ट करें। इस विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी अपनी रिपोर्ट के अनुसार सूर्य की रोशनी में पाए जाने वाले अल्ट्रा वाॅयलेट विकिरण की अधिकता से होने वाले नुकसान की अपेक्षा सूर्य प्रकाश की कमी से होने वाली समस्याओं का बोझ कहीं ज्यादा है। विटामिन-डी लगभग एक हजार जीन के सही संचालन में मददगार है, वो जीन जो मुख्यतः कैल्शियम मेटाबाॅलिज्म, न्यूरोमस्कुलर तंत्र तथा प्रतिरक्षा तंत्र के लिए आवश्यक है। यह विटामिन हमारी त्वचा में सूर्य प्रकाश की मदद से ही बनता है, जिसमें कपड़े, तन की अतिरिक्त चर्बी और त्वचा का मेलैनिन पिगमेंट बाधा डालते हैं। कैल्शियम मेटाबाॅलिज्म पर विटामिन-डी की कमी का असर है हड्डियों का कमजोर होना और कमजोर हड्डी हर घड़ी के दर्द और टीस से लेकर स्त्रियों में गर्भावस्था के दौरान विभिन्न जटिलताओं का कारण बनती है। आजकल बहुत से वैज्ञानिक शोधों के उपरांत विटामिन-डी का उपयोगी किरदार समझ में आ रहा है। मेलाटोनिन, सेरोटोनिन जैसे जैव-रसायनों का बहुत गहन संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी है। विभिन्न अनुसंधानों में पाया गया है कि सूर्य की रोशनी का अभाव तनाव (डिप्रेशन) की समस्या को जन्म देता है। यह तो सर्वविदित है कि सूर्य की ऊर्जा मनुष्य के लिए हानिकारक लगभग सभी बैक्टीरिया, वायरस तथा फफूंद का नाश करती हैं। इसी वैज्ञानिक तथ्य के परिणामस्वरूप हमारे घरों में सदियों से सामान को धूप दिखाकर शुद्ध करने की परम्परा आज भी कायम है।

सभी ब्लॉगर्स साथियों और सुधि पाठकों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!


16 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 15 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

गिरधारी खंकरियाल said...

मकर संक्रान्ति पर सुन्दर एवं तथ्य परक लेख।

Rajendra kumar said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (15.01.2016) को "पावन पर्व मकर संक्रांति " (चर्चा अंक-2222)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

Rajendra kumar said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (15.01.2016) को "पावन पर्व मकर संक्रांति " (चर्चा अंक-2222)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

vijay said...

मकर संक्रांति के सन्दर्भ में अच्छी जानकारी ....पर्व विशेष की शुभकामना!

Unknown said...

मकर संक्रान्ति के विषय में नयी जानकारी मिली ...................................
संक्रांति की मंगलकामना

राजीव कुमार झा said...

सुंदर एवं तथ्यपरक आलेख.मकर संक्रांति की शुभकामनाएं !

Surya said...

न्दर एवं तथ्य परक लेखन .....
उत्तरायण पर्व मकर संक्रांति पर शुभकामनाएं.........

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं । जानकारीयुक्त उम्दा पोस्ट ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं । जानकारीयुक्त उम्दा पोस्ट ।

जसवंत लोधी said...

शुभकामनाएं seetamni. blogspot. in

सदा said...

Bht hi sehjta se mahtvpurn baaton ko aapne aalekh me likha hai.....
Anant shubhkamnayen

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बढिया आलेख है कविता जी. शुभकामनाएं.

Anil Kumar Sharma said...

लेख आज पढ़ा , शुभकामनाये ,विलम्ब से ही सही

Amrita Tanmay said...

अति सुंदर आलेख ।

Unknown said...

आपका यह लेख भजन कीर्तन में प्रकाशित करने की अनुमति दें।