गढ़-कुमाऊँ की बाणी | मातृ भाषा लोक-गीत
कविता रावत
जनवरी 28, 2026
4
धन्य-धन मेरु उत्तराखंड, धन्य येकी बाणी, गढ़-कुमाऊँ की बोली मा, गंगा ज्यू कु पाणी। कथगा सुआणा डाँडा-काँठी, कथगी सुआणी रीत, आवा भैजी-भुली मिलि...
और पढ़ें>>
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: