दीपक: नश्वरता में शाश्वत का बोध
कविता रावत
अक्टूबर 26, 2024
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दीपावली की वह सघन, तमिस्त्र यामिनी, जहाँ पटाखों का कोलाहल है अदम्य, और धूमिल अंबर में घिरा है दृश्य-अदृश्य; वहाँ तिमिर को चुनौती देता ...
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