
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
आदिकाल में दीपावली आर्यों की आर्थिक संपन्नता और हर्षोल्लास का महापर्व थी, जहाँ समृद्धि का मापदंड तिजोरियाँ नहीं, बल्कि लहलहाती फसलें थीं। कृषक समाज के लिए खलिहान से घर आता अन्न ही 'साक्षात स्वर्ण' था। वर्ष भर के कठिन परिश्रम के उपरांत घर आई इस 'अन्न-धन' रूपी लक्ष्मी के स्वागत हेतु घर-आंगन को लीप-पोत कर स्वच्छ किया जाता था। अभाव और दरिद्रता रूपी कूड़े-करकट को बाहर कर, नए कपास की बाती और तिल के तेल के दीपों से नए वर्ष की मंगलकारी आगवानी की जाती थी। यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव न होकर धनतेरस से भाईदूज तक चलने वाली पाँच दिवसीय एक सांस्कृतिक श्रृंखला थी।
परम्परा और आधुनिकता का द्वंद्वआज भी अंधकार पर प्रकाश की विजय के संकल्प के साथ ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का मंत्र गुंजायमान है। अमीर हो या गरीब, हर कोई अपनी सामर्थ्यनुसार कार्तिक अमावस्या की धवल चांदनी बिखेरने का प्रयास करता है। किंतु, इस उजियारे के पीछे की मूल भावना अब बदल चुकी है। जहाँ प्राचीन काल में श्रम और धर्म पर आधारित 'कमलासना लक्ष्मी' (सात्विक समृद्धि) का आह्वान होता था, वहीं आज के भौतिकवादी युग में 'उलूकवाहिनी लक्ष्मी' (चंचल और तामसी धन) का पूजन श्रेयस्कर माना जाने लगा है।
बाजारवाद का बढ़ता प्रभाववर्तमान समय में दीपावली लोक-कल्याण की मूल भावना से कटकर विशुद्ध रूप से 'बाजारवाद' और 'भौतिकवादी संस्कृति' का लबादा ओढ़ चुकी है। त्योहार की शुचिता अब विज्ञापनों और चमक-धमक के शोर में दब गई है। घरों की साज-सज्जा से लेकर उपहारों के आदान-प्रदान तक में अमीर-गरीब की गहरी खाई स्पष्ट दिखाई देती है। दीपावली का उल्लास अब हृदय की आत्मीयता के बजाय बाजार की भीड़ और उपहारों की भव्यता में सिमट गया है।
उपहार संस्कृति और सामाजिक समीकरणआज दीपावली आपसी भाईचारे से अधिक 'सामाजिक निवेश' का पर्व बनती जा रही है। आकर्षक उपहारों की खरीद-फरोख्त के पीछे अक्सर स्वार्थ और भावी समीकरणों को साधने की जुगत होती है। कोई रिश्तों की औपचारिकता निभाने के लिए उपहार चुन रहा है, तो कोई महँगे उपहारों के जरिए वर्ष भर के चैन की 'नींद' सुनिश्चित करने की फिराक में है। मोबाइल, लैपटॉप और कारों के इस दौर में, माटी के दीयों की वह सोंधी महक और निस्वार्थ प्रेम कहीं ओझल होता जा रहा है।
.jpg)

47 टिप्पणियां:
Diwali bahut mubarak ho!
ये जो तंग गली, सड़क किनारे बिखरा
शहर की बहुमंजिला इमारतों/घरों से
सालभर का जमा पुराना कबाड़खाना
बाहर निकल आया उत्सवी रंगत में
उसकी आहट सुन कुछ मासूम बच्चे
खुश हो निकल पड़े हैं उसे हथियाने
यूं ही खेलते-कूदते, लड़ते-झगड़ते
क्योंकि वे भलीभांति जानते हैं हरवर्ष
यही है उनका शहरी दीवाली उपहार!!
......
प्रायः सभी लोग दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजन कर, मेवा-मिठाई खाने-पीने के साथ ही परस्पर उपहार की अपेक्षा कर बैठते हैं, लेकिन जिसके नसीब में जो उपहार लिखा हो उसे वही मिल पाता है।
..... सच्ची बात तो यही है ....
सबके घर रोशन हों यही शुभकामना करते हैं ...
सार्थक पोस्ट .
घर में सुख समृद्धि वहीँ आती है जहाँ घर की लक्ष्मी का सम्मान होता है.
दिवाली तभी शुभ हो पायेगी
जब प्रदुषण से बचा पायेगी.
बम / पटाखे रहित दिवाली के लिए शुभकामनायें .
आपको भी दीपावली की शुभकामनायें
दीपावली की शुभकामनाएँ!
अच्छी और सार्थक पोस्ट
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
बहुत सही कहा आपने कविता जी ....दिवाली मुबारक :)
जिसके हिस्से जो हो ... सच है .दीपावली की स्नेहिल शुभकामनायें
क्योंकि वे भलीभांति जानते हैं हरवर्ष
यही है उनका शहरी दीवाली उपहार!!
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
ये जो तंग गली, सड़क किनारे बिखरा
शहर की बहुमंजिला इमारतों/घरों से
सालभर का जमा पुराना कबाड़खाना
बाहर निकल आया उत्सवी रंगत में
उसकी आहट सुन कुछ मासूम बच्चे
खुश हो निकल पड़े हैं उसे हथियाने
यूं ही खेलते-कूदते, लड़ते-झगड़ते
क्योंकि वे भलीभांति जानते हैं हरवर्ष
यही है उनके नसीब का दीवाली उपहार!
हाँ !ये जो कविता बीन ने वाले नन्ने हाथ हैं इनके लिए कचरे की ढ़ेर सारे कचरे की सौगात ही लाती है दिवाली .वह जो बिना सुइयों वाली घडी जैसा निर्भाव ,सपाट ,उल्लासहीन चेहरा है जिसे लोग मन मोहन बताते हैं वह इसे ही विकास
कहते बतलाते हैं .आंकड़ों की बिसात में यह बढ़ता हुआ कचरा भी शामिल है .मार्मिक ,व्यवस्था गत तंज करती चलती है आपकी रचना .बधाई .दिवाली मुबारक .
एक प्रतिक्रया ब्लॉग पोस्ट :
SATURDAY, NOVEMBER 10, 2012
सबका अपना-अपना दीपावली उपहार!
http://kavitarawatbpl.blogspot.in/2012/11/blog-post.html#comment-form
दीपक नगमे गा रहे,मस्ती रहे बिखेर
सबके हिस्से है खुशी,हो सकती है देर.
दीपावली की हार्दिक बहुत२ शुभकामनाए,,,,
RECENT POST:....आई दिवाली,,,100 वीं पोस्ट,
बहुत ही उम्दा पोस्ट |दीपावली की शुभकामनायें |
दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
धनतेरस की बहुत बहुत शुभकमानएं
एक नजर मेरे नए ब्लाग TV स्टेशन पर डालें
http://tvstationlive.blogspot.in/2012/11/blog-post_10.html?spref=fb
दीपावली का त्यौहार आपके लिए मंगलमय हो
अब अपनी टिप्पणी के साथ अपनी पसंद अनुसार कोई भी ग्रीटिंग भेजें
सबके लिये ही प्रकाशमय हो दीवाली..
बहुत खूबसूरत प्रस्तुति
मन के सुन्दर दीप जलाओ******प्रेम रस मे भीग भीग जाओ******हर चेहरे पर नूर खिलाओ******किसी की मासूमियत बचाओ******प्रेम की इक अलख जगाओ******बस यूँ सब दीवाली मनाओ
कूड़े के ढेर में सौगात ढूंढते बच्चे .... नसीब है ॥
दीपावली की शुभकामनायें
ग्रीटिंग देखने के लिए कलिक करें |
यूनिक ब्लॉग--------- आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाऐं
आपको दीपावली की शुभकामनाएं| ग्रीटिंग देखने के लिए कलिक करें |
नयी पोस्ट : तीन लोग आप का मोबाईल नंबर मांग रहे थे, लेकिन !
दीपोत्सव पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें ....
अच्छी और सार्थक प्रस्तुति....... दीपावली की शुभकामनायें
तमसो मा ज्योतिर्गमय... दीपावली की शुभकामनाएं। नया पोस्ट प्रेम सरोवर पर आपका इंतजार कर रहा है। धन्यवाद।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान
**♥**♥**♥**● राजेन्द्र स्वर्णकार● **♥**♥**♥**
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
भैलो और स्वाले दीवाली का सबसे अच्छा स्वरूप है।
किसी को अपने बच्चों के लिए उपहार स्वरूप देने के लिए आधुनिक मोबाईल, लैपटॉप, बाईक, कार, साइकिल इत्यादि खरीदने की तो किसी को धन-लक्ष्मी रूठे नहीं इसके लिए आपसी भाईचारा और मेल-मिलाप बनाए रखने के लिए अच्छे से अच्छा उपहार खोज निकालने की भारी जिम्मेदारी दिखती है। कोई एक बार में ही शानदार उपहार भेंट कर वर्ष भर सुख-चैन की नींद लेने की फिराक में तो कोई नए समीकरण जुटाने की महाजुगत भिड़ाने के लिए उपहारों के बाजार को खंगालने में जुटा रहता है। प्रायः सभी लोग दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजन कर, मेवा-मिठाई खाने-पीने के साथ ही परस्पर उपहार की अपेक्षा कर बैठते हैं, लेकिन जिसके नसीब में जो उपहार लिखा हो उसे वही मिल पाता है।
बहुत सार्थक आलेख
अन्धा बांटे रेवाड़ी अपनों अपनों को दे ...यही चरितार्थ होती है दीपवाली के उपहारों से ...
दिवाली मुबारक हो ...
***********************************************
धन वैभव दें लक्ष्मी , सरस्वती दें ज्ञान ।
गणपति जी संकट हरें,मिले नेह सम्मान ।।
***********************************************
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
***********************************************
अरुण कुमार निगम एवं निगम परिवार
***********************************************
खूबसूरत प्रस्तुति....आपको भी दीपावली की शुभकामनायें
बहुत सुन्दर लेख
दीपावली की शुभकामनायें!
अच्छी और सार्थक प्रस्तुति
दीपावली की शुभकामनायें!!!!
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं..
deepawali pr hardik subhkamnayhen rawat ji
दीपावली पर सुदर प्रस्तुति । विलंब से मेरी शुभकामनाएं। मेरे नए पोस्ट पर आपका हार्दिक स्वागत है।
अच्छी और सार्थक प्रस्तुति कविता जी ..... दीपावली की शुभकामनायें देरी से पहुच पाया हूँ
Subh deepawali
very nice post...
Namste Kavita Ji..
Bahut hi sunder tarike se aap shabdon ko pirotin ho. Sach me aapki kalam me jaadu hai.
Jai Ram Ji Ki
दीपावली तो अमीरों की ही रहती है गरीब बेचारा क्या खाए क्या उडाये ......उपहार तो किस्मत से ही मिलता है .........
ब्लॉग पढ़कर बड़ी प्रसन्नता हुयी ....दीवापली की मंगल कामनाएं...........
बहुत सही
आदरणीया कविता जी बहुत सुन्दर सन्देश और जानकारी आप सब को भी दीवाली की हार्दिक शुभ कामनाएं ....मन खुश हो गया सुन्दर प्रभावी लेख ...बधाई
भ्रमर 5
सार्थक आलेख
दीपावली बहुत मुबारक हो!
पर्व-परंपरा का सुंदर चित्रण।
देवोत्थानी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा की बधाई।
प्रभावशाली प्रस्तुति - हार्दिक बधाई
ये जो तंग गली, सड़क किनारे बिखरा
शहर की बहुमंजिला इमारतों/घरों से
सालभर का जमा पुराना कबाड़खाना
बाहर निकल आया उत्सवी रंगत में
उसकी आहट सुन कुछ मासूम बच्चे
खुश हो निकल पड़े हैं उसे हथियाने
यूं ही खेलते-कूदते, लड़ते-झगड़ते
क्योंकि वे भलीभांति जानते हैं हरवर्ष
यही है उनके नसीब का दीवाली उपहार
.................................
यथार्थ का बोध कराती सटीक पंक्तियाँ ...
बहुत सुन्दर लेख ....धन्यवाद कविता जी ...
प्रायः सभी लोग दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजन कर, मेवा-मिठाई खाने-पीने के साथ ही परस्पर उपहार की अपेक्षा कर बैठते हैं, लेकिन जिसके नसीब में जो उपहार लिखा हो उसे वही मिल पाता है।
मैडम आपने एकदम सही बात कही है आज उपहार के बिना दिवाली अधूरी हैं ..लेकिन नसीब में जो जिसके लिखा हो ...वही मिलता है .....
देर से सही दीवाली की शुभकामनायें
क्योंकि वे भलीभांति जानते हैं हरवर्ष
यही है उनके नसीब का दीवाली उपहार!..
दिवाली का एक ये भी मार्मिक पहलू हो ... सोचने को मजबूर करती पोस्ट ...
एक टिप्पणी भेजें