रविवार यानी विश्राम का वह बहुप्रतीक्षित दिन, जब कामकाजी महिलाएँ दफ्तर की फाइलों और समय की पाबंदी को भुलाकर मीठे स्वप्नों के संसार में खोई रह सकती हैं। इसी सुकून के मोह में आज मेरी सुबह भी ज़रा देर से हुई। यूँ तो रविवार को दफ्तरों में ताले लटक जाते हैं, लेकिन घर की 'रसोई' एक ऐसा विभाग है जहाँ 'तालाबंदी' का विचार मात्र भी गृह-युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
अतः परिवार की शांति और उदर-पूर्ति हेतु मैंने शीघ्रता से दैनिक कार्यों को निपटाया और नाश्ते-पानी के बाद सीढ़ियों की उस गुनगुनी धूप का रुख किया, जो वहाँ दोपहर एक बजे तक ही अपनी कृपा बरसाती है। अभी मैं धूप का आनंद लेते हुए सोशल मीडिया की दुनिया में विचरण कर ही रही थी कि हमारे '1760 काम वाले भैया' का आगमन हुआ—वही महाशय, जो इन दिनों अपने वैवाहिक जीवन की नींव रखने हेतु एक सुयोग्य कन्या की तलाश में हैं।
प्रतीक्षा और आशंका का द्वंद्वऔपचारिक कुशलक्षेम के उपरांत जब मैंने उनसे इंदौर के परिचय सम्मेलन में पसंद आई लड़की के विषय में प्रगति जाननी चाही, तो वे लंबी सांस भरकर बोले—
"भाभी जी, लड़की तो मुझे बहुत पसंद है और मेरी उससे बात भी हुई है। पर उसने एक सप्ताह तक सोचने-समझने के बाद निर्णय देने की बात कहकर मामला अधर में लटका दिया है। बस, मन में उसी का खटका लगा है।"जब मैंने उन्हें ढांढस बंधाया कि सब ठीक होगा, तो समाज के बदलते परिवेश पर उनकी व्यावहारिक चिंता कुछ इस तरह छलक पड़ी—
"हाँ उम्मीद तो है, पर अब वो जमाना नहीं रहा कि माता-पिता ने जहाँ कह दिया, लड़की ने चुपचाप सिर झुकाकर स्वीकार कर लिया। आजकल परिवार से पहले लड़की की मर्जी सर्वोपरि है, वरना क्या-क्या अनहोनी हो जाती है, यह किसी से छिपा नहीं है। बस यही आशंका मन में बादलों की तरह मंडरा रही है।"
उनकी बातों में आज के दौर की वह सच्चाई थी, जहाँ वैवाहिक निर्णयों में व्यक्तिगत पसंद और समय की मांग अनिवार्य हो गई है। अब इस प्रेम-प्रसंग और रिश्ते की पैरवी करने हेतु मैं स्वयं आज रात उस कन्या से बात करने वाली हूँ, ताकि जान सकूँ कि हमारे इन भैया के बारे में उसकी क्या राय है।परिणाम क्या होगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है, पर वर्तमान की स्थिति को इन पंक्तियों में पिरोया जा सकता है:
अभी उनकी कुछ बात हुई है,
पहली-पहली मुलाक़ात हुई है।
दो दिलों में अभी बड़ी दूरी है,
किस्सा अभी ज़रा सा अधूरा है।
... कविता रावत


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें