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ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

न मंज़िल का पता है, न खुद की खबर है

जनवरी 02, 2026 0
रास्तों का इल्म है, न रहगुज़र का पता है, मगर हर शख्स को ऊंचाइयों का नशा है। वे जो बड़े नाज़ों-नखरों से पले हैं, हथेली पर सरसों उगाने चले हैं...
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